ज़बूर7urd_irv

1ऐ ख़ुदावन्द मेरे ख़ुदा, मेरा भरोसा तुझ पर है;सब पीछा करने वालों से मुझे बचा और छुड़ा,2ऐसा न हो कि वह शेर — ए — बबर की तरह मेरी जान को फाड़े;वह उसे टुकड़े टुकड़े कर दे और कोई छुड़ाने वाला न हो।3ऐ ख़ुदावन्द मेरे ख़ुदा,अगर मैंने यह किया हो, अगर मेरे हाथों से बुराई हुई हो;4अगर मैंने अपने मेल रखने वाले से भलाई के बदले बुराई की हो,बल्कि मैंने तो उसे जो नाहक़ मेरा मुखालिफ़ था, बचाया है;5तो दुश्मन मेरी जान का पीछा करके उसे आ पकड़े,बल्कि वह मेरी ज़िन्दगी को बर्बाद करके मिट्टी में,और मेरी 'इज़्ज़त को ख़ाक में मिला दे। सिलाह6ऐ ख़ुदावन्द, अपने क़हर में उठ;मेरे मुख़ालिफ़ों के ग़ज़ब के मुक़ाबिले में तू खड़ा हो जा;और मेरे लिए जाग! तूने इन्साफ़ का हुक्म तो दे दिया है।7तेरे चारों तरफ़ क़ौमों का इजितमा'अ हो;और तू उनके ऊपर 'आलम — ए — बाला को लौट जा8ख़ुदावन्द, क़ौमों का इन्साफ़ करता है;ऐ ख़ुदावन्द, उस सदाक़त — ओ — रास्ती के मुताबिक़ जो मुझ में है मेरी'अदालत कर।9काश कि शरीरों की बदी का ख़ात्मा हो जाए,लेकिन सादिक़ को तू क़याम बख़्श;क्यूँकि ख़ुदा — ए — सादिक़ दिलों और गुर्दों को जाँचता है।10मेरी ढाल ख़ुदा के हाथ में है,जो रास्त दिलों को बचाता है।11ख़ुदा सादिक़ मुन्सिफ़ है,बल्कि ऐसा ख़ुदा जो हर रोज़ क़हर करता है।12अगर आदमी बाज़ न आए तो वहअपनी तलवार तेज़ करेगा;उसने अपनी कमान पर चिल्ला चढ़ाकर उसे तैयार कर लिया है।13उसने उसके लिए मौत के हथियार भी तैयार किए हैं;वह अपने तीरों को आतिशी बनाता है।14देखो, उसे बुराई की पैदाइश का दर्द लगा है!बल्कि वह शरारत से फलदार हुआ और उससे झूट पैदा हुआ।15उसने गढ़ा खोद कर उसे गहरा किया,और उस ख़न्दक में जो उसने बनाई थी ख़ुद गिरा।16उसकी शरारत उल्टी उसी के सिर पर आएगी;उसका ज़ुल्म उसी की खोपड़ी पर नाज़िल होगा।17ख़ुदावन्द की सदाक़त के मुताबिक़ मैं उसका शुक्र करूँगा,और ख़ुदावन्द ताला के नाम की तारीफ़ गाऊँगा।