ज़बूर60urd_irv
1ऐ ख़ुदा, तूने हमें रद्द किया;तूने हमें शिकस्ता हाल कर दिया।तू नाराज़ रहा है। हमें फिर बहाल कर।2तूने ज़मीन को लरज़ा दिया;तूने उसे फाड़ डाला है।उसके रख़्ने बन्द कर दे क्यूँकि वह लरज़ाँ है।3तूने अपने लोगों को सख़्तियाँ दिखाई,तूने हमको लड़खड़ा देने वाली मय पिलाई।4जो तुझ से डरते हैं, तूने उनको एक झंडा दिया है;ताकि वह हक़ की ख़ातिर बुलन्द किया जाएं। सिलाह5अपने दहने हाथ से बचा और हमें जवाब दे,ताकि तेरे महबूब बचाए जाएँ।6ख़ुदा ने अपनी पाकीज़गी में फ़रमाया है, “मैं ख़ुशी करूँगा;मैं सिकम को तक़सीम करूँगा, और सुकात की वादी को बाटूँगा।7जिल'आद मेरा है, मनस्सी भी मेरा है;इफ़्राईम मेरे सिर का खू़द है,यहूदाह मेरा 'असा है।8मोआब मेरी चिलमची है,अदोम पर मैं जूता फेफूँगा;ऐ फ़िलिस्तीन, मेरी वजह से ललकार।”9मुझे उस मुहकम शहर में कौन पहुँचाएगा?कौन मुझे अदोम तक ले गया है?10ऐ ख़ुदा, क्या तूने हमें रद्द नहीं कर दिया?ऐ ख़ुदा, तू हमारे लश्करों के साथ नहीं जाता।11मुख़ालिफ़ के मुक़ाबले में हमारी मदद कर,क्यूँकि इंसानी मदद बेकार है।12ख़ुदा की मदद से हम बहादुरी करेंगे,क्यूँकि वही हमारे मुख़ालिफ़ों को पस्त करेगा।