ज़बूर3urd_irv
मुसीबत के वक्त आखरी भरोसा
दाऊद का ज़बूर जब वह अपने बेटे अबीसलोम के सामने से भागा गया था।
1ऐ ख़ुदावन्द मेरे सताने वाले कितने बढ़ गए,वह जो मेरे ख़िलाफ़ उठते हैं बहुत हैं।2बहुत से मेरी जान के बारे में कहते हैं,कि ख़ुदा की तरफ़ से उसकी मदद न होगी। सिलाह3लेकिन तू ऐ ख़ुदावन्द, हर तरफ़ मेरी सिपर है।मेरा फ़ख़्र और सरफ़राज़ करने वाला।4मैं बुलन्द आवाज़ से ख़ुदावन्द के सामने फ़रियाद करता हूँऔर वह अपने पाक पहाड़ पर से मुझे जवाब देता है। सिलाह5मैं लेट कर सो गया;मैं जाग उठा, क्यूँकि ख़ुदावन्द मुझे संभालता है।6मैं उन दस हज़ार आदमियों से नहीं डरने का,जो चारों तरफ़ मेरे ख़िलाफ़ इकठ्ठा हैं।7उठ ऐ ख़ुदावन्द, ऐ मेरे ख़ुदा, मुझे बचा ले!क्यूँकि तूने मेरे सब दुश्मनों को जबड़े पर मारा है। तूने शरीरों के दाँत तोड़ डाले हैं।8नजात ख़ुदावन्द की तरफ़ से है।तेरे लोगों पर तेरी बरकत हो!