ज़बूर142urd_irv
1मैं अपनी ही आवाज़ बुलंद करके ख़ुदावन्द से फ़रियाद करता हूँमै अपनी ही आवाज़ से ख़ुदावन्द से मिन्नत करता हूँ।2मैं उसके सामने फ़रियाद करता हूँ,मैं अपना दुख उसके सामने बयान करता हूँ।3जब मुझ में मेरी जान निढाल थी,तू मेरी राह से वाक़िफ़ था!जिस राह पर मैं चलता हूँ उसमे उन्होंने मेरे लिए फंदा लगाया है।4दहनी तरफ़ निगाह कर और देख,मुझे कोई नहीं पहचानता। मेरे लिए कहीं पनाह न रही,किसी को मेरी जान की फ़िक्र नहीं।5ऐ ख़ुदावन्द, मैंने तुझ से फ़रियाद की;मैंने कहा, तू मेरी पनाह है,और ज़िन्दों की ज़मीन में मेरा बख़रा।6मेरी फ़रियाद पर तवज्जुह कर,क्यूँकि मैं बहुत पस्त हो गया हूँ!मेरे सताने वालों से मुझे रिहाई बख़्श,क्यूँकि वह मुझ से ताक़तवर हैं।7मेरी जान को कै़द से निकाल,ताकि तेरे नाम का शुक्र करूँ सादिक़ मेरे गिर्द जमा होंगेक्यूँकि तू मुझ पर एहसान करेगा।