ज़बूर14urd_irv
1बेवकू़फ़ ने अपने दिल में कहा है, कि कोई ख़ुदा नहीं। वह बिगड़ गए,उन्होंने नफ़रतअंगेज़ काम किए हैं;कोई नेकोकार नहीं।2ख़ुदावन्द ने आसमान पर से बनी आदम पर निगाह की ताकि देखे कि कोई अक़्लमन्द,कोई ख़ुदा का तालिब है या नहीं।3वह सब के सब गुमराह हुए, वह एक साथ नापाक हो गए,कोई नेकोकार नहीं, एक भी नहीं।4क्या उन सब बदकिरदारों को कुछ'इल्म नहीं,जो मेरे लोगों को ऐसे खा जाते हैं जैसे रोटी,और ख़ुदावन्द का नाम नहीं लेते?5वहाँ उन पर बड़ा ख़ौफ़ छा गया,क्यूँकि ख़ुदा सादिक़ नसल के साथ है।6तुम ग़रीब की मश्वरत की हँसी उड़ाते हो;इसलिए के ख़ुदावन्द उसकी पनाह है।7काश कि इस्राईल की नजात सिय्यून में से होती!जब ख़ुदावन्द अपने लोगों को ग़ुलामी से लौटा लाएगा,तो या'क़ूब ख़ुश और इस्राईल शादमान होगा।