ज़बूर139urd_irv
1ऐ ख़ुदावन्द! तूने मुझे जाँच लिया और पहचान लिया।2तू मेरा उठना बैठना जानता है;तू मेरे ख़याल को दूर से समझ लेता है।3तू मेरे रास्ते की और मेरी ख़्वाबगाह की छान बीन करता है,और मेरे सब चाल चलन से वाक़िफ़ है।4देख! मेरी ज़बान पर कोई ऐसी बात नहीं,जिसे तू ऐ ख़ुदावन्द पूरे तौर पर न जानता हो।5तूने मुझे आगे पीछे से घेर रखा है,और तेरा हाथ मुझ पर है।6यह इरफ़ान मेरे लिए बहुत 'अजीब है;यह बुलन्द है, मैं इस तक पहुँच नहीं सकता।7मैं तेरी रूह से बचकर कहाँ जाऊँ?या तेरे सामने से किधर भागूँ?8अगर आसमान पर चढ़ जाऊँ, तो तू वहाँ है।अगर मैं पाताल में बिस्तर बिछाऊँ, तो देख तू वहाँ भी है!9अगर मैं सुबह के पर लगाकर,समन्दर की इन्तिहा में जा बसूँ,10तो वहाँ भी तेरा हाथ मेरी राहनुमाई करेगा,और तेरा दहना हाथ मुझे संभालेगा।11अगर मैं कहूँ कि यक़ीनन तारीकी मुझे छिपा लेगी,और मेरी चारों तरफ़ का उजाला रात बन जाएगा।12तो अँधेरा भी तुझ से छिपा नहीं सकता,बल्कि रात भी दिन की तरह रोशन है;अँधेरा और उजाला दोनों एक जैसे हैं।13क्यूँकि मेरे दिल को तू ही ने बनाया;मेरी माँ के पेट में तू ही ने मुझे सूरत बख़्शी।14मैं तेरा शुक्र करूँगा, क्यूँकि मैं 'अजीबओ — ग़रीब तौर से बना हूँ।तेरे काम हैरत अंगेज़ हैं मेरा दिल इसे खू़ब जानता है।15जब मैं पोशीदगी में बन रहा था,और ज़मीन के तह में 'अजीब तौर से मुरतब हो रहा था,तो मेरा क़ालिब तुझ से छिपा न था।16तेरी आँखों ने मेरे बेतरतीब माद्दे को देखा,और जो दिन मेरे लिए मुक़र्रर थे, वह सब तेरी किताब में लिखे थे;जब कि एक भी वुजूद में न आया था।17ऐ ख़ुदा! तेरे ख़याल मेरे लिए कैसे बेशबहा हैं।उनका मजमूआ कैसा बड़ा है!18अगर मैं उनको गिनूँ तो वह शुमार में रेत से भी ज़्यादा हैं।जाग उठते ही तुझे अपने साथ पाता हूँ।19ऐ ख़ुदा! काश के तू शरीर को क़त्ल करे।इसलिए ऐ ख़ूनख़्वारो! मेरे पास से दूर हो जाओ।20क्यूँकि वह शरारत से तेरे ख़िलाफ़ बातें करते हैं:और तेरे दुश्मन तेरा नाम बेफ़ायदा लेते हैं।21ऐ ख़ुदावन्द! क्या मैं तुझ से 'अदावत रखने वालों से 'अदावत नहीं रखता,और क्या मैं तेरे मुख़ालिफ़ों से बेज़ार नहीं हूँ?22मुझे उनसे पूरी 'अदावत है,मैं उनको अपने दुश्मन समझता हूँ।23ऐ ख़ुदा, तू मुझे जाँच और मेरे दिल को पहचान।मुझे आज़मा और मेरे ख़यालों को जान ले!24और देख कि मुझ में कोई बुरा चाल चलन तो नहीं,और मुझ को हमेशा की राह में ले चल!