ज़बूर138urd_irv

1मैं पूरे दिल से तेरा शुक्र करूँगा;मा'बूदों के सामने तेरी मदहसराई करूँगा।2मैं तेरी पाक हैकल की तरफ़ रुख़ कर के सिज्दा करूँगा,और तेरी शफ़क़त औए सच्चाई की ख़ातिर तेरे नाम का शुक्र करूँगा।क्यूँकि तूने अपने कलाम को अपने हरनाम से ज़्यादा 'अज़मत दी है।3जिस दिन मैंने तुझ से दुआ की, तूने मुझे जवाब दिया,और मेरी जान की ताक़त देकर मेरा हौसला बढ़ाया।4ऐ ख़ुदावन्द! ज़मीन के सब बादशाह तेरा शुक्र करेंगे,क्यूँकि उन्होंने तेरे मुँह का कलाम सुना है;5बल्कि वह ख़ुदावन्द की राहों का हम्द गाएंगेक्यूँकि ख़ुदावन्द का जलाल बड़ा है।6क्यूँकि ख़ुदावन्द अगरचे बुलन्द — ओ — बाला है,तोभी ख़ाकसार का ख़याल रखता है;लेकिन मग़रूर को दूर ही से पहचान लेता है।7चाहे मैं दुख में से गुज़रूं तू मुझे ताज़ादम करेगा,तू मेरे दुश्मनों के क़हर के ख़िलाफ़ हाथ बढ़ाएगा,और तेरा दहना हाथ मुझे बचा लेगा।8ख़ुदावन्द मेरे लिए सब कुछ करेगा;ऐ ख़ुदावन्द! तेरी शफ़क़त हमेशा की है।अपनी दस्तकारी को न छोड़।