ज़बूर126urd_irv
1जब ख़ुदावन्द सिय्यून के गुलामों को वापस लाया,तो हम ख़्वाब देखने वालों की तरह थे।2उस वक़्त हमारे मुँह में हँसी,और हमारी ज़बान पर रागनी थी;तब क़ौमों में यह चर्चा होने लगा,“ख़ुदावन्द ने इनके लिए बड़े बड़े काम किए हैं।”3ख़ुदावन्द ने हमारे लिए बड़े बड़े काम किए हैं,और हम ख़ुश हैं!4ऐ ख़ुदावन्द! दखिन की नदियों की तरह,हमारे गुलामों को वापस ला।5जो आँसुओं के साथ बोते हैं,वह खु़शी के साथ काटेंगे।6जो रोता हुआ बीज बोने जाता है,वह अपने पूले लिए हुए ख़ुश लौटेगा।