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जल्द ही लूट-खसोट

1रब मुझसे हमकलाम हुआ, “एक बड़ा तख़्ता लेकर उस पर साफ़ अलफ़ाज़ में लिख दे, ‘जल्द ही लूट-खसोट, सुरअत से ग़ारतगरी’।”2मैंने ऊरियाह इमाम और ज़करियाह बिन यबरकियाह की मौजूदगी में ऐसा ही लिख दिया, क्योंकि दोनों मोतबर गवाह थे।3उस वक़्त जब मैं अपनी बीवी नबिया के पास गया तो वह उम्मीद से हुई। बेटा पैदा हुआ, और रब ने मुझे हुक्म दिया, “इसका नाम ‘जल्द ही लूट-खसोट, सुरअत से ग़ारतगरी’ रख।4क्योंकि इससे पहले कि लड़का ‘अब्बू’ या ‘अम्मी’ कह सके दमिश्क़ की दौलत और सामरिया का मालो-असबाब छीन लिया गया होगा, असूर के बादशाह ने सब कुछ लूट लिया होगा।”

शिलोख़ का पानी रद्द करने का बुरा अंजाम

5एक बार फिर रब मुझसे हमकलाम हुआ,6“यह लोग यरूशलम में आराम से बहनेवाले शिलोख़ नाले का पानी मुस्तरद करके रज़ीन और फ़िक़ह बिन रमलियाह से ख़ुश हैं।7इसलिए रब उन पर दरियाए-फ़ुरात का ज़बरदस्त सैलाब लाएगा, असूर का बादशाह अपनी तमाम शानो-शौकत के साथ उन पर टूट पड़ेगा। उस की तमाम दरियाई शाख़ें अपने किनारों से निकल कर8सैलाब की सूरत में यहूदाह पर से गुज़रेंगी। ऐ इम्मानुएल, पानी परिंदे की तरह अपने परों को फैलाकर तेरे पूरे मुल्क को ढाँप लेगा, और लोग गले तक उसमें डूब जाएंगे।”9ऐ क़ौमो, बेशक जंग के नारे लगाओ। तुम फिर भी चकनाचूर हो जाओगी। ऐ दूर-दराज़ ममालिक के तमाम बाशिंदो, ध्यान दो! बेशक जंग के लिए तैयारियाँ करो। तुम फिर भी पाश पाश हो जाओगे। क्योंकि जंग के लिए तैयारियाँ करने के बावुजूद भी तुम्हें कुचला जाएगा।10जो भी मनसूबा तुम बान्धो, बात नहीं बनेगी। आपस में जो भी फ़ैसला करो, तुम नाकाम हो जाओगे, क्योंकि अल्लाह हमारे साथ है।

रब नबी को क़ौम के बारे में आगाह करता है

11जिस वक़्त रब ने मुझे मज़बूती से पकड़ लिया उस वक़्त उसने मुझे इस क़ौम की राहों पर चलने से ख़बरदार किया। उसने फ़रमाया,12“हर बात को साज़िश मत समझना जो यह क़ौम साज़िश समझती है। जिससे यह लोग डरते हैं उससे न डरना, न दहशत खाना13बल्कि रब्बुल-अफ़वाज से डरो। उसी से दहशत खाओ और उसी को क़ुद्दूस मानो।14तब वह इसराईल और यहूदाह का मक़दिस होगा, एक ऐसा पत्थर जो ठोकर का बाइस बनेगा, एक चट्टान जो ठेस लगने का सबब होगी। यरूशलम के बाशिंदे उसके फंदे और जाल में उलझ जाएंगे।15उनमें से बहुत सारे ठोकर खाएँगे। वह गिरकर पाश पाश हो जाएंगे और फंदे में फँसकर पकड़े जाएंगे।”

रब का कलाम शागिर्दों के हवाले करना है

16मुझे मुकाशफ़े को लिफाफे में डालकर महफ़ूज़ रखना है, अपने शागिर्दों के दरमियान ही अल्लाह की हिदायत पर मुहर लगानी है।17मैं ख़ुद रब के इंतज़ार में रहूँगा जिसने अपने चेहरे को याक़ूब के घराने से छुपा लिया है। उसी से मैं उम्मीद रखूँगा।18अब मैं हाज़िर हूँ, मैं और वह बच्चे जो अल्लाह ने मुझे दिए हैं, हम इसराईल में इलाही और मोजिज़ाना निशान हैं जिनसे रब्बुल-अफ़वाज जो कोहे-सिय्यून पर सुकूनत करता है लोगों को आगाह कर रहा है।19लोग तुम्हें मशवरा देते हैं, “जाओ, मुरदों से राबिता करनेवालों और क़िस्मत का हाल बतानेवालों से पता करो, उनसे जो बारीक आवाज़ें निकालते और बुड़बुड़ाते हुए जवाब देते हैं।” लेकिन उनसे कहो, “क्या मुनासिब नहीं कि क़ौम अपने ख़ुदा से मशवरा करे? हम ज़िंदों की ख़ातिर मर्दों से बात क्यों करें?”20अल्लाह की हिदायत और मुकाशफ़ा की तरफ़ रुजू करो! जो इनकार करे उस पर सुबह की रौशनी कभी नहीं चमकेगी।21ऐसे लोग मायूस और फ़ाक़ाकश हालत में मुल्क में मारे मारे फिरेंगे। और जब भूके मरने को होंगे तो झुँझलाकर अपने बादशाह और अपने ख़ुदा पर लानत करेंगे। वह ऊपर आसमान22और नीचे ज़मीन की तरफ़ देखेंगे, लेकिन जहाँ भी नज़र पड़े वहाँ मुसीबत, अंधेरा और हौलनाक तारीकी ही दिखाई देगी। उन्हें तारीकी ही तारीकी में डाल दिया जाएगा।