होसेअ6urd_gvh
1उस वक़्त वह कहेंगे, “आओ, हम रब के पास वापस चलें। क्योंकि उसी ने हमें फाड़ा, और वही हमें शफ़ा भी देगा। उसी ने हमारी पिटाई की, और वही हमारी मरहम-पट्टी भी करेगा।2दो दिन के बाद वह हमें नए सिरे से ज़िंदा करेगा और तीसरे दिन हमें दुबारा उठा खड़ा करेगा ताकि हम उसके हुज़ूर ज़िंदगी गुज़ारें।3आओ, हम उसे जान लें, हम पूरी जिद्दो-जहद के साथ रब को जानने के लिए कोशाँ रहें। वह ज़रूर हम पर ज़ाहिर होगा। यह उतना यक़ीनी है जितना सूरज का रोज़ाना तुलू होना यक़ीनी है। जिस तरह मौसमे-बहार की तेज़ बारिश ज़मीन को सेराब करती है उसी तरह अल्लाह भी हमारे पास आएगा।”4“ऐ इसराईल, मैं तेरे साथ क्या करूँ? ऐ यहूदाह, मैं तेरे साथ क्या करूँ? तुम्हारी मुहब्बत सुबह की धुंध जैसी आरिज़ी है। धूप में ओस की तरह वह जल्द ही काफ़ूर हो जाती है।5इसी लिए मैंने अपने नबियों की मारिफ़त तुम्हें पटख़ दिया, अपने मुँह के अलफ़ाज़ से तुम्हें मार डाला है। मेरे इनसाफ़ का नूर सूरज की तरह ही तुलू होता है।6क्योंकि मैं क़ुरबानी नहीं बल्कि रहम पसंद करता हूँ, भस्म होनेवाली क़ुरबानियों की निसबत मुझे यह पसंद है कि तुम अल्लाह को जान लो।