हिज़क़ियेल3urd_gvh
1उसने फ़रमाया, “ऐ आदमज़ाद, जो कुछ तुझे दिया जा रहा है उसे खा ले! तूमार को खा, फिर जाकर इसराईली क़ौम से मुख़ातिब हो जा।”2मैंने अपना मुँह खोला तो उसने मुझे तूमार खिलाया।3साथ साथ उसने फ़रमाया, “आदमज़ाद, जो तूमार मैं तुझे खिलाता हूँ उसे खा, पेट भरकर खा!” जब मैंने उसे खाया तो शहद की तरह मीठा लगा।4तब अल्लाह मुझसे हमकलाम हुआ, “ऐ आदमज़ाद, अब जाकर इसराईली घराने को मेरे पैग़ामात सुना दे।5मैं तुझे ऐसी क़ौम के पास नहीं भेज रहा जिसकी अजनबी ज़बान तुझे समझ न आए बल्कि तुझे इसराईली क़ौम के पास भेज रहा हूँ।6बेशक ऐसी बहुत-सी क़ौमें हैं जिनकी अजनबी ज़बानें तुझे नहीं आतीं, लेकिन उनके पास मैं तुझे नहीं भेज रहा। अगर मैं तुझे उन्हीं के पास भेजता तो वह ज़रूर तेरी सुनतीं।7लेकिन इसराईली घराना तेरी सुनने के लिए तैयार नहीं होगा, क्योंकि वह मेरी सुनने के लिए तैयार ही नहीं। क्योंकि पूरी क़ौम का माथा सख़्त और दिल अड़ा हुआ है।8लेकिन मैंने तेरा चेहरा भी उनके चेहरे जैसा सख़्त कर दिया, तेरा माथा भी उनके माथे जैसा मज़बूत कर दिया है।9तू उनका मुक़ाबला कर सकेगा, क्योंकि मैंने तेरे माथे को हीरे जैसा मज़बूत, चक़माक़ जैसा पायदार कर दिया है। गो यह क़ौम बाग़ी है तो भी उनसे ख़ौफ़ न खा, न उनके सुलूक से दहशतज़दा हो।”10अल्लाह ने मज़ीद फ़रमाया, “ऐ आदमज़ाद, मेरी हर बात पर ध्यान देकर उसे ज़हन में बिठा।11अब रवाना होकर अपनी क़ौम के उन अफ़राद के पास जा जो बाबल में जिलावतन हुए हैं। उन्हें वह कुछ सुना दे जो रब क़ादिरे-मुतलक़ उन्हें बताना चाहता है, ख़ाह वह सुनें या न सुनें।”12तब अल्लाह के रूह ने मुझे वहाँ से उठाया। मैंने अपने पीछे एक गिड़गिड़ाती आवाज़ सुनी : मुबारक हो रब का जलाल अपनी जगह से!13तब अल्लाह के रूह ने मुझे वहाँ से उठाया। मैंने अपने पीछे एक गिड़गिड़ाती आवाज़ सुनी : मुबारक हो रब का जलाल अपनी जगह से!14अल्लाह का रूह मुझे उठाकर वहाँ से ले गया, और मैं तलख़मिज़ाजी और बड़ी सरगरमी से रवाना हुआ। क्योंकि रब का हाथ ज़ोर से मुझ पर ठहरा हुआ था।15चलते चलते मैं दरियाए-किबार की आबादी तल-अबीब में रहनेवाले जिलावतनों के पास पहुँच गया। मैं उनके दरमियान बैठ गया। सात दिन तक मेरी हालत गुमसुम रही।