1दाऊद बादशाह सलामती से अपने महल में रहने लगा। एक दिन उसने नातन नबी से बात की, “देखें, मैं यहाँ देवदार के महल में रहता हूँ जबकि रब के अहद का संदूक़ अब तक तंबू में पड़ा है। यह मुनासिब नहीं!”2नातन ने बादशाह की हौसलाअफ़्ज़ाई की, “जो कुछ भी आप करना चाहते हैं वह करें। अल्लाह आपके साथ है।”3लेकिन उसी रात अल्लाह नातन से हमकलाम हुआ,4“मेरे ख़ादिम दाऊद के पास जाकर उसे बता दे कि रब फ़रमाता है, ‘तू मेरी रिहाइश के लिए मकान तामीर नहीं करेगा।5आज तक मैं किसी मकान में नहीं रहा। जब से मैं इसराईलियों को मिसर से निकाल लाया उस वक़्त से मैं ख़ैमे में रहकर जगह बजगह फिरता रहा हूँ।6जिस दौरान मैं तमाम इसराईलियों के साथ इधर-उधर फिरता रहा क्या मैंने इसराईल के उन राहनुमाओं से कभी इस नाते से शिकायत की जिन्हें मैंने अपनी क़ौम की गल्लाबानी करने का हुक्म दिया था? क्या मैंने उनमें से किसी से कहा कि तुमने मेरे लिए देवदार का घर क्यों नहीं बनाया?’7चुनाँचे मेरे ख़ादिम दाऊद को बता दे, ‘रब्बुल-अफ़वाज फ़रमाता है कि मैं ही ने तुझे चरागाह में भेड़ों की गल्लाबानी करने से फ़ारिग़ करके अपनी क़ौम इसराईल का बादशाह बना दिया है।8जहाँ भी तूने क़दम रखा वहाँ मैं तेरे साथ रहा हूँ। तेरे देखते देखते मैंने तेरे तमाम दुश्मनों को हलाक कर दिया है। अब मैं तेरा नाम सरफ़राज़ कर दूँगा, वह दुनिया के सबसे अज़ीम आदमियों के नामों के बराबर ही होगा।9और मैं अपनी क़ौम इसराईल के लिए एक वतन मुहैया करूँगा, पौदे की तरह उन्हें यों लगा दूँगा कि वह जड़ पकड़कर महफ़ूज़ रहेंगे और कभी बेचैन नहीं होंगे। बेदीन क़ौमें उन्हें उस तरह नहीं दबाएँगी जिस तरह माज़ी में किया करती थीं,10उस वक़्त से जब मैं क़ौम पर क़ाज़ी मुक़र्रर करता था। मैं तेरे दुश्मनों को ख़ाक में मिला दूँगा। आज मैं फ़रमाता हूँ कि रब ही तेरे लिए घर बनाएगा।11जब तू बूढ़ा होकर कूच कर जाएगा और अपने बापदादा से जा मिलेगा तो मैं तेरी जगह तेरे बेटों में से एक को तख़्त पर बिठा दूँगा। उस की बादशाही को मैं मज़बूत बना दूँगा।12वही मेरे लिए घर तामीर करेगा, और मैं उसका तख़्त अबद तक क़ायम रखूँगा।13मैं उसका बाप हूँगा और वह मेरा बेटा होगा। मेरी नज़रे-करम साऊल पर न रही, लेकिन मैं उसे तेरे बेटे से कभी नहीं हटाऊँगा।14मैं उसे अपने घराने और अपनी बादशाही पर हमेशा क़ायम रखूँगा, उसका तख़्त हमेशा मज़बूत रहेगा’।”
दाऊद की शुक्रगुज़ारी
15नातन ने दाऊद के पास जाकर उसे सब कुछ सुनाया जो रब ने उसे रोया में बताया था।16तब दाऊद अहद के संदूक़ के पास गया और रब के हुज़ूर बैठकर दुआ करने लगा, “ऐ रब ख़ुदा, मैं कौन हूँ और मेरा ख़ानदान क्या हैसियत रखता है कि तूने मुझे यहाँ तक पहुँचाया है?17और अब ऐ अल्लाह, तू मुझे और भी ज़्यादा अता करने को है, क्योंकि तूने अपने ख़ादिम के घराने के मुस्तक़बिल के बारे में भी वादा किया है। ऐ रब ख़ुदा, तूने यों मुझ पर निगाह डाली है गोया कि मैं कोई बहुत अहम बंदा हूँ।18लेकिन मैं मज़ीद क्या कहूँ जब तूने यों अपने ख़ादिम की इज़्ज़त की है? ऐ रब, तू तो अपने ख़ादिम को जानता है। तूने अपने ख़ादिम की ख़ातिर और अपनी मरज़ी के मुताबिक़ यह अज़ीम काम करके इन अज़ीम वादों की इत्तला दी है।20ऐ रब, तुझ जैसा कोई नहीं है। हमने अपने कानों से सुन लिया है कि तेरे सिवा कोई और ख़ुदा नहीं है।21दुनिया में कौन-सी क़ौम तेरी उम्मत इसराईल की मानिंद है? तूने इसी एक क़ौम का फ़िद्या देकर उसे ग़ुलामी से छुड़ाया और अपनी क़ौम बना लिया। तूने इसराईल के वास्ते बड़े और हैबतनाक काम करके अपने नाम की शोहरत फैला दी। हमें मिसर से रिहा करके तूने क़ौमों को हमारे आगे से निकाल दिया।22ऐ रब, तू इसराईल को हमेशा के लिए अपनी क़ौम बनाकर उनका ख़ुदा बन गया है।23चुनाँचे ऐ रब, जो बात तूने अपने ख़ादिम और उसके घराने के बारे में की है उसे अबद तक क़ायम रख और अपना वादा पूरा कर।24तब वह मज़बूत रहेगा और तेरा नाम अबद तक मशहूर रहेगा। फिर लोग तसलीम करेंगे कि इसराईल का ख़ुदा रब्बुल-अफ़वाज वाक़ई इसराईल का ख़ुदा है, और तेरे ख़ादिम दाऊद का घराना भी अबद तक तेरे हुज़ूर क़ायम रहेगा।25ऐ मेरे ख़ुदा, तूने अपने ख़ादिम के कान को इस बात के लिए खोल दिया है। तू ही ने फ़रमाया, ‘मैं तेरे लिए घर तामीर करूँगा।’ सिर्फ़ इसी लिए तेरे ख़ादिम ने यों तुझसे दुआ करने की जुर्रत की है।26ऐ रब, तू ही ख़ुदा है। तूने अपने ख़ादिम से इन अच्छी चीज़ों का वादा किया है।27अब तू अपने ख़ादिम के घराने को बरकत देने पर राज़ी हो गया है ताकि वह हमेशा तक तेरे सामने क़ायम रहे। क्योंकि तू ही ने उसे बरकत दी है, इसलिए वह अबद तक मुबारक रहेगा।”