1याहवेह से विनती करो कि वह वसन्त ऋतु में वर्षा भेजें;यह याहवेह ही है जो बादलों को गरजाते और आंधी लाते है.वह सब लोगों को वर्षा देते,और हर एक के लिए खेत में पौधा उपजाते हैं.2मूर्तियां धोखा देनेवाली बात कहते हैं,और भावी कहनेवाले झूठे दर्शन देखते हैं;वे झूठे स्वप्न के बारे में बताते हैं,और वे व्यर्थ में सांत्वना देते हैं.इसलिये चरवाहे की कमी के कारण दुःख सेलोग भेड़ की तरह भटकते हैं.3“मेरा क्रोध चरवाहों पर भड़क रहा है,ओर मैं अगुओं को दंड दूंगा;क्योंकि सर्वशक्तिमान याहवेह अपने झुंडअर्थात् यहूदाह के लोगों की देखरेख करेगा,और वह उन्हें युद्ध में गर्व करनेवाले घोड़े के समान बनाएगा.4यहूदाह से कोने का पत्थर आयेगा,उससे तंबू की खूंटी,उससे युद्ध का धनुष,और उससे ही हर एक शासक आएंगे.5एक साथ वे युद्ध में उन योद्धाओं के समान होंगे,जो गली के कीचड़ में अपने शत्रुओं को रौंदते हैं.वे लड़ेंगे क्योंकि याहवेह उनके साथ है,और वे शत्रु के घुड़सवारों को लज्जित करेंगे.6“मैं यहूदाह के लोगों को मजबूत करूंगाऔर योसेफ़ के वंश को बचाऊंगा.उनके प्रति अपनी करुणा के कारणमैं उन्हें लौटा ले आऊंगा.वे ऐसे हो जाएंगेमानो मैंने उन्हें कभी त्यागा ही न था,क्योंकि मैं उनका परमेश्वर याहवेह हूंइसलिये मैं उनकी सुनकर उन्हें उत्तर दूंगा.7तब एफ्राईमी लोग योद्धा के समान हो जाएंगे,उनका हृदय ऐसा प्रफुल्लित होगा, जैसा दाखमधु पीने से होता है.उनके बच्चे इसे देखकर आनंदित होंगे;और उनका मन याहवेह में आनंदित होगा.8मैं उन्हें संकेत देकरइकट्ठा करूंगा.निश्चित रूप से, मैं उन्हें छुड़ाऊंगा;वे पहले की तरह असंख्य हो जाएंगे.9यद्यपि मैंने उन्हें लोगों के बीच में बिखरा दिया है,फिर भी उन दूर देशों में वे मुझे स्मरण करेंगे.वहां वे और उनकी संतान बचे रहेंगे,और वे लौट आएंगे.10मैं उन्हें मिस्र देश से लौटा लाऊंगाऔर उन्हें अश्शूर देश से इकट्ठा करूंगा.मैं उन्हें गिलआद और लबानोन देश में ले आऊंगा,और उन्हें इतना बढ़ाऊंगा कि वहां उनके लिये पर्याप्त जगह न होगी.11वे समस्याओं के समुद्र से होकर गुज़रेंगे;समुद्र की बड़ी लहरें शांत कर दी जाएंगीनील नदी का सब गहरा जल सूख जाएगा.अश्शूरियों का घमंड तोड़ दिया जाएगाऔर मिस्र का राजदंड जाता रहेगा.12मैं उन्हें याहवेह में मजबूत करूंगाऔर वे उसके नाम में सुरक्षित रहा करेंगे.”याहवेह की यह घोषणा है.