1याहवेह, आप ही मेरे परमेश्वर हैं;मैं आपकी प्रशंसा करूंगा और आपके नाम की महिमा करूंगा,क्योंकि आपने बड़े अद्भुत काम किए हैं,और उन सनातन योजनाओं कोपूरी विश्वस्तता एवं सच्चाई से आपने पूरा किया है.2आपने नगरों को गिरा दिया,और खंडहर कर दिया,परदेशियों का अब कोई नगर नहीं;और न ही उन्हें फिर बसाया जाएगा.3इसलिये बलवंत प्रजा आपकी महिमा करेगी;और निर्दयी आपका भय मानेंगे.4दीनों के लिए आप शरणस्थान,और विपत्ति के समय आप उनके लिए ढाल होंगे,दरिद्रों के लियेउनके शरण और रक्षक होंगे.5जैसे निर्जल देश में बादल से ठंडक होती है;वैसे ही परदेशियों का कोलाहल,और निर्दयी लोगों का जय जयकार शांत हो जाएगा.6इसी पर्वत पर सर्वशक्तिमान याहवेहसब लोगों को भोजन खिलाएंगे,जिसमें पुराना दाखरस—और उत्तम से उत्तम चिकना भोजन जो अच्छा और स्वादिष्ट होगा.7इस पर्वत पर आकर सब जातियोंऔर देशों के बीच जो पर्दा,और दीवार है तोड़ देगा;8वह सदा-सर्वदा के लिए मृत्यु को नाश करेंगे.और प्रभु याहवेह सभी के चेहरों सेआंसुओं को पोंछ देंगे;वह अपने लोगों की निंदा कोदूर कर देंगे.याहवेह का यह संदेश है.9उस दिन लोग यह कहेंगे,“कि, यही हैं हमारे परमेश्वर;यही हैं वह याहवेह जिनका हमने इंतजार किया.आओ, हम उनके उद्धार में आनंद मनाएंऔर प्रसन्न रहेंगे.”10क्योंकि याहवेह का हाथ सदा बना रहेगा;मोआब उनके द्वारा रौंद दिया जाएगाजिस प्रकार गोबर-कुण्ड में एक तिनके को रौंद दिया जाता है.11जिस प्रकार एक तैराक अपने हाथों को फैलाता है,उसी प्रकार मोआब भी अपने हाथों को फैलाएगा.किंतु याहवेह उसके घमंड को चूर-चूरऔर उसके हाथों की कुशलता को कमजोर कर देंगे.12याहवेह उसकी दृढ़ शहरपनाह को गिरा देंगेवह उन्हें भूमि पर फेंक देंगे;उन्हें मिट्टी में मिला देंगे.