यशायाह10hin_cvb
1हाय उन पर जो गलत न्याय करतेऔर उन पर दबाव डालने की आज्ञा लिख देते हैं,2कि वे कंगालों को न्याय से दूर कर देंऔर गरीबों के अधिकारों को छीन लें,जिससे वे विधवाओं को लूट सकेंऔर अनाथों को अपना शिकार बना सकें.3क्या करोगे तुम दंड और विनाश के दिन पर,जो दूर से आएगा?तब सहायता के लिए तुम दौड़कर किसके पास जाओगे?और कहां छिपाओगे अपने आपको?4बंदियों के बीच चापलूसी और मरे हुओं के बीच छिपने के सिवाकोई भी रास्ता नहीं रह जाएगा.इतना सब होने पर भी, उनका क्रोध नहीं हटेगा,और उनका हाथ उठा रहेगा.