1बड़ी सच्चाई यह है: हमारे महापुरोहित वह हैं, जो स्वर्ग में महामहिम के दायें पक्ष में बैठे हैं,2जो वास्तविक मंदिर में सेवारत हैं, जिसका निर्माण किसी मानव ने नहीं, स्वयं प्रभु ने किया है.3हर एक महापुरोहित का चुनाव भेंट तथा बलि अर्पण के लिए किया जाता है. इसलिये आवश्यक हो गया कि इस महापुरोहित के पास भी अर्पण के लिए कुछ हो.4यदि मसीह येशु पृथ्वी पर होते, वह पुरोहित हो ही नहीं सकते थे क्योंकि यहां व्यवस्था के अनुसार भेंट चढ़ाने के लिए पुरोहित हैं.5ये वे पुरोहित हैं, जो स्वर्गीय वस्तुओं के प्रतिरूप तथा प्रतिबिंब मात्र की आराधना करते हैं, क्योंकि मोशेह को, जब वह तंबू का निर्माण करने पर थे, परमेश्वर के द्वारा यह चेतावनी दी गई थी: यह ध्यान रखना कि तुम तंबू का निर्माण ठीक-ठीक वैसा ही करो, जैसा तुम्हें पर्वत पर दिखाया गया था,6किंतु अब मसीह येशु ने अन्य पुरोहितों की तुलना में कहीं अधिक अच्छी सेवकाई प्राप्त कर ली है: अब वह एक उत्तम वाचा के मध्यस्थ भी हैं, जिसका आदेश उत्तम प्रतिज्ञाओं पर हुआ है.7यदि वह पहली वाचा निर्दोष होती तो दूसरी की ज़रूरत ही न होती.8स्वयं परमेश्वर ने उस पीढ़ी को दोषी पाकर यह कहा:“यह देख लेना, वे दिन आ रहे हैं, यह प्रभु की वाणी है,जब मैं इस्राएल वंश के साथतथा यहूदाह गोत्र के साथएक नयी वाचा स्थापित करूंगा.9वैसी नहीं,जैसी मैंने उनके पूर्वजों से उस समय की थी,जब मैंने उनका हाथपकड़कर उन्हें मिस्र देश से बाहर निकाला था,क्योंकि वे मेरी वाचा में स्थिर नहीं रहे,इसलिये मैं उनसे दूर हो गया,यह प्रभु का कहना है.10किंतु मैं इस्राएल के लोगों के साथ यह वाचा बांधूंगायह प्रभु का कथन है उन दिनों के बादमैं अपना नियम उनके हृदय में लिखूंगाऔर उनके मस्तिष्क पर अंकित कर दूंगा.मैं उनका परमेश्वर हो जाऊंगा,तथा वे मेरी प्रजा.11तब हर एक व्यक्ति अपने पड़ोसी को शिक्षा नहीं देंगे, हर एक व्यक्ति अपने सजातीय को पुनःयह नहीं कहेगा, ‘प्रभु को जान लो,’क्योंकि वे सभी मुझे जान जाएंगे,छोटे से बड़े तक,यह प्रभु की वाणी है.12क्योंकि मैं उनकी पापिष्ठता क्षमा कर दूंगातथा इसके बाद उनका पाप मैं पुनः स्मरण ही न करूंगा.”13जब परमेश्वर एक “नई” वाचा का वर्णन कर रहे थे, तब उन्होंने पहले को अनुपयोगी घोषित कर दिया. जो कुछ अनुपयोगी तथा जीर्ण हो रहा है, वह नष्ट होने पर है.