1मैं बहे पौलुस जो तुमरे अग्गु दीन हौं, और तुमसे दूर होन मैं नाय डरान बारो बन जाथौं, तुमकै मसीह की दया और कोमलता की बजह से समझाथौं2मैं तुमसे बिनती करथौं, कि मेरे आन मैं मोकै कठोर होन ताहीं मजबूर नाय करैं; मोकै बिस्वास है, कि मैं उन इंसानन के संग कठोरता से निपट सकथौं, जो कहथैं, कि हम सरीर के इरादे से काम चलन बारे समझथैं।3काहैकि अगर हम सरीर मैं चलथैं फिरथैं, तहुँओं सरीर के हिसाब से नाय लड़थैं।4हम अपनी लड़ाई मैं जो हथियारन को इस्तमाल करथैं, बे दुनिया के हथियार नाय हैं, बल्किन परमेस्वर के ताकतबर हथियार हैं, जोको इस्तमाल हम गढ़ कै खतम करन ताहीं करथैं। हम झूठी गभाईयन कै खतम करथैं;5हम परमेस्वर के ग्यान के बिरोध मैं उठन बारी हर गौरवपूर्ड़ बाधा कै नीचे खींचथैं; हम हर बिचार कै बंधी बनाथैं और जाकै मसीह को पालन करते हैं।6और समरे रहथैं कि जब तुमरो काम पूरो हुई जाबै, तौ हर एक जैसिन कै आग्या नाय मानन बारेन कै सजा देमैं।7तुम चीजन कि बाहरी उपस्थिति कै देखरै हौ। का कोई ऐसो आदमी है जो खुदकै या खुदकै मसीह से संबंधित मानथै? ठीक है, उनकै फिर से अपने बारे मैं सोचन देमैं, काहैकि हम मसीह के उतनोई हैं जितने बे करथैं।8तुमरे बिनास के ताहीं ना, बल्कि तुमरे आध्यात्मिक निर्माड़ के ताहीं हमैं प्रभु से जो अधिकार मिलो है, अगर मैं बाके ऊपर जाधे गरब कर रौ हों, तौ मोकै जौ बात की कोई सरम ना है।9जौ मैं इसलै कहरौ हौं, कि चिट्ठिन के जरिये तुमकै डरपान बारो ना बनौ।10बे कहथैं, “कि पौलुस की चिट्ठीयैं तौ गंभीर और मजबूत है, लेकिन जब बौ आदमी मैं हमरे संग होथै, तौ बौ सरीर मैं कमजोर होथै, और बाके सब्द कुछ भी ना होथैं!”11ऐसे आदमिन कै जौ समझनो चाहिए कि जब हम दूर होथैं तौ हम अपनी चिट्ठिन मैं जो लिखथैं बामै कोई अंतर ना होथै और जब हम तुमरे संग होथैं तौ हम का करंगे।12हमरी इतनी हिम्मत ना है कि हम अपने आपकै उनके संग मैं गिनैं। या फिर उनकै अपने से मिलामै! जो अपनी मोहों बड़ाँईं खुदै करथैं, और खुदकै आपसै मैं नाप तोलकै एक दुसरे से मिलाएकै गधन जैसी करथैं!13हम तौ हद से जाधा कतई घमंड ना करंगे, खाली बहे हद तक घमंड करंगे, जितनो परमेस्वर हमकै हक दई है, और बामै तुम्हऊँ आए गै हौ, और बहे के हिसाब से घमंड करंगे, और जामैं हमरो काम भी सामिल है।14हम अपनी औकात से बाहर अपने आपकै बड़ानो नाय चाहथैं, जैसे कि तुमरे ले नाय पुगन की हालत मैं होतो, लेकिन मसीह को सुसमाचार सुनात भइ तुमरे ले पुग चुको है।15और हम अपनी हद से बाहर दुसरे के काम मैं गुमान नाय करथै; लेकिन हमकै आस है, कि जैसे-जैसे तुमरो बिस्वास बढ़तै जागो, बैसिये हम अपनी हद के हानी तुमरी बजह से औरौ बड़तै जामंगे।16फिर हम तुमरे अलावा दुसरे देसन मैं सुसमाचार को प्रचार कर सकथैं और कोई छेत्र मैं पहले से करे गै काम के बारे मैं घमंड ना करनो चाहिए।17लेकिन जैसो कि सास्त्र कहथै, “जो कोई घमंड करनो चाहथै बाकै जौ बात मैं घमंड करनो चाहिए कि प्रभु का करी है।”18काहैकि जौ बे लोगन के ताहीं है जिनकै प्रभु अच्छी तरह से समझथैं जो बास्तव मैं अपनाओ जाथै, ना बे लोग जो खुद के बारे मैं अच्छो सोचथैं।