1“झूठी बात मत फैलावो। अऊर झूठी गवाही दे क अन्यायी लोगों को साथ मत देजो।2बुरायी करन लायी बहुतों को पीछू मत पड़जो; अऊर न उन्को पीछू फिर क् मुकद्दमा म न्याय बिगाड़न लायी गवाही देजो;3अऊर गरीब को मुकद्दमा म ओको भी पक्ष मत लेजो।4“फिर यदि तोरो दुश्मन को बईल यां गधा भटकतो हुयो तोख मिलेंन, त ओख ओको जवर जरूर वापस ले आजो।5फिर यदि तय अपनो दुश्मन को गधा ख बोझ को मारे दब्यो हुयो देखो, तब भी जरूर मालिक की मदत कर क् ओख छुड़ाय लेजो करजो।6“तोरो लोगों म सी जो गरीब हय ओको मुकद्दमा म न्याय मत बिगाड़जो7झूठो मुकद्दमा सी दूर रहजो, अऊर निर्दोष अऊर सच्चो ख घात मत करजो, कहालीकि मय बुरो ख निर्दोष नहीं ठहराऊं,8तय घुस नहीं लेजो, कहालीकि घुस आदमी ख सच सी अन्धो कर देवय अऊर सच्चो की न्याय बिगाड़ देवय हय।9“परदेशी पर जुलूम मत करजो; तुम त परदेशी को मन की बात जानय हय, कहालीकि तुम भी मिस्र देश म परदेशी होतो।
सातवों साल अऊर सातवों दिन
10“छय साल तक अपनी जमीन म बीज बोवो अऊर ओकी फसल जमा करजो;11पर सातवों साल म ओख खाली रहन देजो अऊर वसोच छोड़ देजो, त गरीब लोग अऊर जो कुछ उन्को सी भी बच जायेंन त जंगली जनावर ख खान को काम म आये। अपनी अंगूर अऊर जैतून की बाड़ी सी भी असोच करजो।12छय दिन तक अपनो काम काज करजो, अऊर सातवों दिन आराम करजो ताकि तोरो बईल अऊर गधा सुस्तायेंन, अऊर तोरी सेविका को टुरा अऊर परदेशी ख भी आराम मिल सकेंन।13जो कुछ मय न तुम सी कह्यो हय ओको पालन करजो; अऊर अन्य देवतावों की नाम की चर्चा भी मत करजो, बल्की हि तुम्हरो मुंह सी सुनायी भी नहीं दे।
तीन मुख्य त्यौहार
14“हर साल तीन बार मोरो लायी त्यौहार मानजो।15पहिलो पवित्र त्यौहार अखमीरी रोटी को त्यौहार मनायजो; ओको म मोरी आज्ञा को अनुसार अबीब महीना को नियत समय पर सात दिन तक अखमीरी रोटी खायो करनो, कहालीकि ओको महीना म तुम लोग मिस्र देश सी निकल आये होतो। मोख कोयी खाली हाथ अपनो मुंह नहीं दिखाये।16जब तोरी बोयी हुयी खेत की पहिली फसल तैयार होना, तब कटनी को त्यौहार मनायजो। साल को आखरी म जब तय मेहनत की फसल जमा कर क् ढेर लगायजो, तब जमा करन को त्यौहार मनायजो।17हर साल तीनों बार तोरो सब लोग प्रभु परमेश्वर ख अपनो मुंह दिखाये।18“मोरो जनावर को बलिदानको खून खमीरी रोटी को संग नहीं चढ़ाजो, अऊर नहीं मोरो त्यौहार को उत्तम बलिदान म सी कुछ सुबेरे तक रहन देजो।19अपनो जमीन की पहिली फसल को पहिलो हिस्सा अपनो परमेश्वर यहोवा को भवन म ले आजो। शेरी को बच्चा ओकी माय को दूध म नहीं पकाजो।
वादा अऊर चेतावनी
20“सुन, मय एक दूत तोरो आगु आगु भेजूं जो रस्ता म तोरी रक्षा करेंन, अऊर जो जागा ख मय न तैयार करयो हय उत तोख पहुंचायेंन।21ओको आगु सावधान रहजो, अऊर ओकी मानजो, ओको विरोध मत करजो, कहालीकि ऊ तोरो अपराध माफ नहीं करेंन; येकोलायी कि मोरो नाम ओको म हय।22यदि तय सचमुच मोरी आज्ञा मानेंन अऊर जो कुछ मय कहूं ऊ करय, त मय तोरो दुश्मनों को दुश्मन अऊर तोरो बैरियों को बैरी बनूं।23जब मोरो दूत आगु चल क तोख एमोरी, हित्ती, परिज्जी, कनानी, हिब्बी, अऊर यबूसी लोगों को यहां पहुंचायेंन, अऊर मय उन्ख सत्यानाश कर डालूं।24उन्को देवतावों ख दण्डवत मत करजो, अऊर नहीं उन्की आराधना करजो, अऊर नहीं उन्को सी काम करजो, बल्की उन मूर्तियों को पूरी रीति सी सत्यानाश कर डालजो, अऊर उन लोगों को खम्बा को तुकड़ा तुकड़ा कर देजो।25तय अपनो परमेश्वर यहोवा की आराधना करजो, तब ऊ तोरो भोजन अऊर पानी पर आशीष देयेंन, अऊर तोरो बीच म सी रोग दूर करेंन।26तोरो देश म नहीं त कोयी को गर्भ गिरेंन अऊर नहीं कोयी बांझ रहेंन; अऊर तोरी उमर को दिन मय पूरो करूं।27जितनो लोगों को बीच तय जाजो उन सब को मन म मय अपनो डर पहिले सी असो समाय देऊं कि उन्ख परेशान कर देऊं, अऊर मय तोख सब दुश्मन ख वापस जान लायी विवश कर देऊं।28अऊर मय तोरो सी पहिले गंदनल ख भेजूं जो हिब्बी, कनानी, अऊर हित्ती लोगों ख तोरो आगु सी भगाय क दूर कर देयेंन।29मय उन्ख तोरो आगु सी एकच साल म नहीं निकालूं, असो नहीं होय कि देश उजाड़ होय जाये, अऊर जंगली जनावर बढ़ क तोरी हानि करेंन।30जब तक तय बढ़ क देश पर अपनो अधिकार नहीं कर ले तब तक मय उन्ख तोरो आगु सी थोड़ो थोड़ो कर क् निकालतो रहूं।31मय तोरी सीमा लाल समुन्दर सी ले क पलिश्तियों को समुन्दर तक अऊर जंगल सी ले क फरात नदी तक को देश ख तोरो वश म कर देऊं; मय ऊ देश को निवासियों ख भी तोरो वश म कर देऊं, अऊर तय उन्ख अपनो जवर सी निकाल देयेंन।32तय नहीं त उन्को सी वाचा बान्धजो अऊर नहीं उन्को देवतावों सी।33हि तोरो देश म नहीं रहनो पाये, असो नहीं होय कि हि तोरो सी मोरो खिलाफ पाप करायेंन; यदि तय उन्को देवतावों की आराधना करे त यो तोरो लायी फन्दा बनेंन।”