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बिलदद

1तब सूही के रहइया बिलदद ह जबाब दीस:2“परभूता अऊ भय के अधिकारी परमेसर ही अय;ओह ऊंच स्वरग म सांति स्थापित करथे।3का ओकर सेनामन के गनती करे जा सकथे?अइसे कोन हवय, जेकर ऊपर ओकर अंजोर नइं परय?4तब एक मरनहार मनखे ह परमेसर के आघू म कइसे धरमी हो सकथे?माईलोगन ले जनमे मनखे ह कइसे सुध हो सकथे?5कहूं ओकर नजर म चंदा ह घलो उजलाअऊ तारामन घलो ओकर नजर म सुध नइं अंय,6त फेर मरनहार मनखे के का गनती, जऊन ह सिरिप एक गेंगरूआ अय—एक मनखे, जऊन ह सिरिप एक कीरा अय!”