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यसायाह के आयोग

1जऊन बछर उजियाह राजा ह मरिस, मेंह परभू ला ऊंचहा अऊ महिमा के संग एक सिंघासन म बिराजमान देखेंव; अऊ ओकर ओनहा के घेरा ले मंदिर ढंपा गे रिहिस।2ओकर ऊपर म सारापमनरहंय, अऊ हर एक के छै-छै ठन डेना रहंय: दू ठन डेना ले ओमन अपन मुहूं ला अऊ दू ठन डेना ले अपन गोड़मन ला ढांपे रहंय, अऊ दू ठन डेना ले ओमन उड़त रहंय।3अऊ ओमन एक-दूसर ला नरिया-नरियाके कहत रिहिन:“सर्वसक्तिमान यहोवा ह पबितर, पबितर, पबितर ए;पूरा धरती ह ओकर महिमा ले भरे हवय।”4ओमन के अवाज ले दुवार अऊ चौखटमन डोल गीन, अऊ मंदिर ह धुआं ले भर गीस।5तब मेंह चिचियाके कहेंव, “मोर ऊपर हाय! मेंह नास हो गेंव! काबरकि मेंह असुध ओंठवाला मनखे अंव, अऊ मेंह असुध ओंठवाले मनखेमन के बीच म रहिथंव, अऊ मोर आंखीमन राजा, सर्वसक्तिमान यहोवा ला देखे हवंय।”6तब एक ठन साराप ह हांथ म एक ठन बरत अंगरा ला धरके मोर करा उड़ियाके आईस; ओह ओ अंगरा ला बेदी म ले चिमटा ले उठाय रिहिस।7ओह ओ अंगरा ले मोर मुहूं ला छूके कहिस, “देख, येह तोर ओंठ ला छुये हवय; तोर अपराध ह दूर हो गे हवय अऊ तोर पाप ला छेमा कर दिये गे हवय।”8तब मेंह परभू के अवाज ला ये कहत सुनेंव, “मेंह कोन ला पठोवंव? अऊ कोन ह हमर बर जाही?” त मेंह कहेंव, “मेंह इहां हंव। मोला पठो।”9ओह कहिस, “जा, अऊ ये मनखेमन ला कह:“ ‘सुनत ही रहव, पर कभू झन समझव;देखत ही रहव, पर कभू झन बुझव।’10ये मनखेमन के मन ला कठोर,ओमन के कान ला भारीअऊ ओमन के आंखीमन ला बंद कर दे।अइसन झन होवय कि ओमन अपन आंखी ले देखंय,अपन कान ले सुनंय,अपन मन म समझंयअऊ मन फिराके चंगा हो जावंय।”11तब मेंह पुछेंव, “हे परभू, कब तक?” ओह जबाब दीस:“जब तक नगरमन उजड़ नइं जावंयअऊ उहां कोनो झन बचंय,जब तक घरमन ला खाली नइं छोंड़ दिये जावयअऊ खेतमन बरबाद होके नास नइं हो जावंय,12जब तक यहोवा ह हर एक जन ला उहां ले दूरिहा नइं कर देवयअऊ देस ला पूरा तियाग नइं दिये जावय।13अऊ हालाकि मनखेमन के दसवां हिस्सा उहां रही जाथे,तभो ले येला फेर नास करे जाही।पर जइसे छोटे अऊ बड़े बलूत रूख ला काटे के बाद घलोओकर ठूंठ ह बांच जाथे,वइसे ही पबितर बीजा ह ओ देस के ठूंठ होही।”