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अदमी अरु लुगेन

1या रित से हे लुगइहोन अपना तुम खे अपना अदमी का अधीन ऱ्हे, अगर कोय परमेश्वर को वचन पर विश्वास नी कर्‍हे ते व्हा तुम्हारो व्यवाहार से विश्वास करण का लिये जीत्यो जाह्ये येका लिये तुमखे ओकासे कोय बात करण की भी जरुरत नी हइ,2क्युकी वे देख्ये की तुम्हारो स्वभाव कसो अच्छो अरु भक्तिपुरो हइ.3अपना आप खे साजरी करण का लिये बाहेर सझनो सवरनो खे इस्तेमाल नी कर्‍यो, जसो की बाल गुथीले, या फिर सोना को बर्तन पेनन, या अच्छा अच्छा कपडा पेननो,4जब की तुम्हारी साजरी तुम्हारो अंदरुनी व्यकतीत्व बनस हइ, नाजुक व अविनाशी सजावट से साजरी र्‍हियेका परमेश्वर की नजर मे जो मोलको हय.5पैयले युग कि पवित्र लुगइ भी जो परमेश्वर पर आस रखती थी, अपना आप खे या रीति से सवारती अरु अपना अपना इन्सानहोन का अंदर र्‍हेती थी.6जसो सारा अपनो अदमी अब्राहम की आज्ञा मे रहेती अरु वोको स्वामी बोलती थी यो प्रकार भी अगर अच्छो करीखे अरु कोय प्रकार को डर से डरनु नी हुये ते सारा की बेटिहोन रुख्ये.7वसो य हे इन्सानहोन तुम भी समझदारी से लुगइ का साथ जिवन बिताव, अरु बय खे कमजोर समजी खे वोको सम्मान कर, यो समजीखे कि हम दो जिवन को वरदान मे उनखे अपनो सय उत्तराधिकारी मान्यो जबकी तुमारी प्रार्थनाहोन मे बाध्यो नी पड्यो.

अच्छो काम करन का लिये दुख भोगो

8आखरी मे तुम सब का सब एक मन अरु क्रुपामय भावना अरु भयचारा से की प्रेम रखन आलो, अरु दयालु से, अरु एक दूसरा से नम्र बन.9बुरा का बदल बुरो मत कर. अरु नी श्राप का बदल श्राप दे. जबकी बदला मे आशिर्वाद दे क्युकि आशीर्वाद हइ जो परमेश्वर ने तुमखे देन को वचन दियो थो जब तुमखे बुलायो थो.10जसो शास्त्र मे लिख्यो हइ,अगर तुमखे अपनी जिवन को प्रेम लेनो हइअरु अच्छा दिन की इच्छा रखस हइ ते,अरु ओखे होनु कि छल कि बात बोलना से रोख्येअरु झुट बोलनो बन्द कर्‍हे.11व्हा बुरा को साथ छोड अरु अच्छो कर.व्हा पुरा दिल से शांती मीलन का लिये प्रयास कर्‍हे.12क्युकि प्रभु की आखहोन धर्मीहोन पर लगी रहेस हइ,अरु वोका कान वोकि प्रार्थना बिनती का तरप लगी रहेस हइ,पन प्रभु बुरो करण आला का बदलामे मुडो फेरी लेस हइ.13अगर तुम अच्छो करणा का लिये तैयार ऱ्ही ते तुम्हारी बुइय करण आला फिर कोन हइ?14अगर तु सच्ची कारन दुख भी उठायेका ते धन्य हइ. पर दुन्या का डराना से मत डरो, अरु नी घबरानु .15पन अपना मन मे मसीह का लिये श्रध्दा रख अरु ओखे प्रभु जानीखे आदर दे. अरु अगर कोय तुमसे तुमारी आस का बारे मे जो तुमारा मे हइ समजान खे बोल्हे ते ओखे उत्तर देन का लिये कबिभी तैयार र्‍हियेका16पन यो विन्रमता अरु इज्जत का सात ही कर अरु अपनो विवेक खे शुध्द रखन का जबकी यीशु मसीह अच्छी चाल चलना मे तुम्हारो अपमान करता हुयो लाजनू.17क्युकि अगर परमेश्वर की या इच्छा हय कि तुम अच्छो करण का कारन दुख उठायेका ते यो बुरो करण का बदलामे दुख उठाना से खुप अच्छो हइ.18येका लिये मसीह ने भी सब पापिहोन का लिये येक ही बार मर्‍यो यानेकी वु जो नीर्दोष थो हम पापीहोन का लिये एक बार मरी गयो की हम परमेश्वर खे नजीक लीखे जाये. आंग का भावसे ते वु मरी गयो पर आत्मा का भाव जीगयो.19अरु वोकी आत्मा की स्थिति मे जैखे वे बन्दीगृह आत्माहोन खे खबर दि.20यो आत्माहोन हइ जो वा टेम्म मे परमेश्वर की आज्ञा खे मन से नी मानन वाली थी, जब नूह को डोंगा बनायो जय रो थो अरु परमेश्वर धिरज का सात प्रतीक्षा खे र्‍हियो थो वु डोंगा मे थोडा दुन्या यानेकी आट झन पाणी का वजेसे बची गया.21यो बपतिस्मा का जसो हइ जेका से अब तुमारो उध्दार होतो हइ, येमे आंग को मैल धोनु नी जबकी एक अच्छो विवेक का लिये परमेश्वर से कसम हइ, अब तो तुमखे यीशु मसीह को पुनरुत्थान बपतिस्मा का वजेसे बचास हइ.22व्हा स्वर्ग पर जय खे परमेश्वर का जवना तरप बठी गो. अरु स्वर्गदूत अरु अधिकारी अरु सामर्थ्य वोका आधीन कर्यो गयो हइ.