1तुम मरा जसी चाल चलनु जसो मी मसीह का जसी चाल चलुस हइ.
प्रार्थना सभा मे माथो झाकन को लिवाज
2मी तुमारी बडाइ करुस हइ, कि सब बातहोन मे तुम मेखे याद करस हइ. अरु जो वीधी मेने तुमखे दि दियो हइ, रितीरिवाज खे कठोरता से करस हइ.3पर मी चाहुस हइ, कि तुम यो जानी ले, कि हर एक इन्सान को माथो मसीह हइ अरु लुगइ को माथो इन्सान हइ अरु मसीह को माथो परमेश्वर हइ.4जो इन्सान माथो झाक्या हुया प्रार्थना या भविष्यवाणी करस हइ, उ अपनो माथा को अपमान करस हइ.5पर जो बय बिना माथो झाखे प्रार्थना या भविष्यवाणी करस हइ, वा अपना माथा का अपमान करस हइ, क्युकि वा टक्कल होना का बराबर हइ.6अगर बय ओडनी नी ओड्ये, ते बाल भी काटी ले. अगर बय का लिये बाल कटानो या टक्कल सरम की बात हइ, तो ओडनी होडनु.7हा इन्सान खे अपनो माथो झाकनो अच्छो नी, क्युकि उ परमेश्वर को रुप अरु महिमा हइ. रुप पर लुगइ अदमी की शोभा हइ.8क्युकि अदमी लुगइ से नी हुयो, पर लुगइ इन्सान से हुइ हइ.9अरु अदमी लुगय का लिये नी परदा कर्यो गयो, पर लुगय अदमी का लिये करी गय हइ.10येकालिये स्वर्गदूतहोन का कारण लुगइ को अच्छो हइ, कि अधिकार अपना माथा पर रखनु.11ते भी प्रभु मे नी ते लुगइ बिना अदमी अरु नी अदमी बिना लुगइ कि हइ.12क्युकि जसो लुगइ अदमी से हइ, ओसो ही अदमी लुगइ का वजेसे हइ. पर सब चिजहोन परमेश्वर से हइ.13तुम खुद ही बिचार करणु, का बय खे बिना माथो झाखे परमेश्वर से प्रार्थना करणो अच्छो हइ?14का स्वभाविक रीति से भी तुम नी जाने कि अगर अदमी लम्बा बाल रख्ये, ते ओका लिये अपमान हइ.15पर अगर बय लम्बा बाल रखनु. ते ओका लिये शोभा हइ क्युकि बाल ओखे ओडन का खे लिये दिया गया हइ.16पर अगर कोय वाद विवाद करणो चाह्ये, ते यो जान्नु कि नी हमारी अरु नी परमेश्वर की मंडलीहोन की असी रीति हइ.
प्रभु खान का बारे मे
17पर या आज्ञा देता हुये मी तुमारी नी बडैइ, येकालिये कि तुमारा जमा होना से भलाइ नी, पर नुकसान होस हइ.18क्युकि पैयले तो मी यो सुनुस हइ, कि जब तुम मंडली मे जमा होस हइ, ते तुम मे फूट होस हइ अरु मी थोडो-थोडो विश्वास भी करुस हइ.19क्युकि गैरयहूदी भी तुम मे जरुरती हुये, येकालिये कि जो इन्सान तुम मे सच्चा नीकल्या हइ, वे प्रकट हुइ जाये.20जब तुम एक जगह मे जमा हुये ते तुम प्रभु-भोज खानो खान का लिये नी.21क्युकि खान का टेम एक दूसरा से पैयले अपनो खानो खैइ लेस हइ, तब कोय भूखो र्हेस हइ, अरु कोय मतआलो हुइ जास हइ.22का खान-पीन का लिये तुमारा घर नी? या परमेश्वर की मंडली खे बेकार जानस हइ, अरु जिनका पास नी हइ उनखे लज्जित करस हइ? मी तुम से का बोलु? का या बात मे तुमारी बडइ कर्यु? मी बडइ नी करु.23क्युकि या बात मेखे प्रभु से पहुची, अरु मेने तुमखे भी पहुचैइ दी. कि प्रभु यीशु ने जो रात पकडायो गयो रोटी ली,24अरु धन्यवाद करीखे ओखे तोडि खे अरु बोल्यो, “यो मरो आंग हइ, जो तुमारा लिये हइ मरी याद का लिये यो किर्या करणु.”25या रीति से ओने बियारी का बाद कटोरो भी लियो, अरु बोल्यो “यो कटोरो मरा खुन मे नइ वाचा हइ जब कभी पीये, ते मरी याद का लिये यो कर्यो करणु.”26क्युकि जब कभी तुम या रोटी खाये, अरु यो कटोरा मे से पीस हइ, ते प्रभु को मरन खे जब तक उ नी आय, प्रचार करस हइ.27येकालिये जो कोय अच्छा रीति से प्रभु की रोटी खाये या ओका कटोरा मे से पीये, उ प्रभु का आंग अरु खुन को अपराधी ठैइर्ये.28येकालिये इन्सान अपना आप खे समज्हे अरु या रीति से या रोटी मे से खाह्ये, अरु यो कटोरा मे से पीये.29क्युकि जो खाता-पीता टेम प्रभु का आंग खे नी पइछान्ये, उ यो खाना अरु पीना से अपना उपर दण्ड लास हइ.30यो कारण तुम मे भोत सा बिना जोर अरु रोगी हइ, अरु भोत सा सोइ भी गया.31अगर हम अपना आप खे पहिछानता था ते दण्ड नी मील्हे.32पर प्रभु हमखे दण्ड दिखे हमारी ताडनो करस हइ येकालिये कि हम संसार का साथ दोषी नी ठैइर्ये.33येकालिये, हे मरा भैइहोन अरु बहीन, जब तुम खान का लिये जमा होस हइ, ते एक दूसरा का लिये ठैइरा करणु.34अगर कोय भूखो हइ, ते अपना घर मे खलइ ले जिका से तुमारो जमा होनो दण्ड को कारण नी हो, अरु बाकी बातहोन खे मी अयखे ठीक करी दियु.