1एखर बाद नापै के निता अक्ठी फिता मोके दय गइस, जउन नापै के डंडा के जसना दिखत रहै, मोके कहे गइस, “उठ अउ भगवान के मन्दिर अउ बेदी के नाप अउ जउन मनसेन मन्दिर के भित्तर अराधना करत हबै, उनखर गिनती के।2पय मन्दिर के बाहर अंगना के छांड देबे, उके झइ नापहे, काखे हइ दूसर कुर के दइ दय गय हबै, उन बयालिस महिना तक पवितर सहर के अपन गोड लग कचरहिन।3मै अपन दुइठे गवाह के आदेस दइहों अउ ऊ अक हजार दुइ सव साठ दिन तक आगू कर बात गुठेही, ऊ सन के फट्टी ओढ के अराधना करत रइहीं।”4हइ दुइ गवाह जैतून के दुइठे रूख अउ दुइठे चिमनी हबै जउन भुंइ के परभु के आगू ठाढ हबै।5अगर कउ उनके हानि पहुंचामै चाहथै, ता उनखर मुंह लग आगी निकडथै अउ ऊ इनखर बैरी के नास के देथै, जउन इनके हानि पहुंचामै चाही, उके हइ मेर लग मरैके पडही।6इन बादर के बन्द कर देय के सक्ति हबै कि उनखर आगू कर बात के दिनन हे बरिसा झइ होय, उन हे पानी के खून हे बलद देय के अउ जब-जब ऊ चइहिन, भुंइ हे महामारी के पठोमै के हक हबै।7जब ऊ अपन गवाही दइ चुकै के बाद, ऊ गोरू ऊ अथाह कुन्ड लग बाहिर निकडही अउ उनखर लग लडाई करही अउ उनके हराय के उनही नास के डरही।8उनखर लोथ ऊ महानसहर के चउकी हे पडे रही, हइ सहर जउन सरल भासा अउ आतमिक रूप हे सदोम अउ मिस्र कहाथै, इहै उनखर परभु के क्रूस हे चढाय के मारे रथै।9सगलू मनसे, कुर, भासा अउ देस के साढे तीन रोज तक उनखर लोथ के देखै के निता अउत रइहिन अउ ऊ उन लोथन के मरघटी हे गाढै नेहको दइहिन।10भुंइ के रहैबाले उनखर मिरतू हे खुसी मनइहिन, इहां तक कि उन अक दूसर के दान दइहिन काखे हइ दोनो ग्यानी मनसे भुंइ के रहैबाले के बोहत दुख दय रथै।11पय साढे तीन रोज बाद भगवान के पल्ला लग हइ दोनो हे जीवन के सांस आइस अउ हइ उठके ठाढ हुइ गइस, तब सब देखैबाले हे बोहत डर छाय गइस।12स्वरग लग अक्ठी तेज आरो आथै अउ हइ कथै, “इछो, उप्पर आ” अउ ऊ अपन बैरी के देखत-देखत बादर हे स्वरग के तरफ कढ गइस।13उहै टेम बोहत भुंइडोल हुइस अउ सहर के दसमा भाग माटी हे मिल गइस, सात हजार मनसे भुंइडोल हे मर गइन अउ जउन बच गइन, उनखर भित्तर डर समाय गइस अउ उन स्वरग के भगवान के धन्यबाद महिमा करै लगिन।14सुना दूसर महापरेसानी बीत गइस, अब तीसर महापरेसानी हरबी आमै बाले हबै।
सतमा पोंगा
15जब सतमा स्वरगदूत पोंगा के बजाइस, ता स्वरग लग हइ कइन मेर के आरो आथै, “दुनिया के राज अब हमर परभु अउ उनखर मसीह के राज हुइ गय हबै, उहै जुग-जुग राज करही।”16तब उन चउबीसो सियान, जउन अपन-अपन राजगद्दी हे बइठे रथै, भगवान के आगू परनाम करत ओखर अराधना करिन।17हे“सर्वसक्तिमान परभु भगवान जउन हबै अउ जउन रथै,हम तोके धन्यबाद देथन, काखे तै अपन सक्ति के प्रदरसन करिस,अउ राजधिकार स्वीकार के लय हबै।18देस गुस्सा हुइ गइस,उनखर उप्पर तोर बोहत गुस्सा आय गय हबै,अब टेम आ गय हबै, कि मरे हर के नियाव करे जाय,तोर हरवाह ग्यानी मनसे, पवितर मनसे,अउ तोर सगलू बिस्वास करै बाले चाहे ऊ सही होय या खास होय जउन तोर नाम लग डरथै,उनखर बदला दय जही,अउ तोर दवारा उनके नास करे जाय, जउन भुंइ के नास करथै।”19तब भगवान के मन्दिर, जउन स्वरग हे हबै, खोल दय गइस अउ ऊ मन्दिर हे उनखर टीमा के पेटी दिखथै, उहै टेम बिजली चमकै लगिस अउ बादर के गडगडाहट गरजन हुइस अउ अक्ठी भुंइडोल हुइस अउ बडा-बडा ओर गिरिस।