परम आखा सी मटु छे
1कदी मे माणसेन ने सरग वाळा काहवाळ्यान बुले बुलो ने परम नी राखो, ती मे ठण-ठणावती पीतळ, ने झणझणो करती झांझ छे।2ने कदी मे भगवानेन अघी सी आवणे वाळी वात देखाड़ सको, ने आखा सातायली वातेन ने आखा तरान अक्कल काजे समजो, ने मेसे जां लग पुरु भुरसु हवे की मे बयड़ा काजे छेटु करदम, बाकुन परम नी राखो, ती मे काय बी नी हय।3कदी मे आपणो पुरो धन तींद्रे झुणी कायनी हय तीनु काजे खावड़ दम, नीते आपणो डील धपाड़ने वाटे आप दम, ने परम नी राखो, ती मेसे काय बी फायदु नी हय।4परम दमधरे, ने कीर्पाळु छे; परम डाहवाय नी करे; परम आपणी बड़ाय नी करे, ने मटकाळु नी हय,5चु गलत रीत सी नी चाले, चु आपणी भलाय नी चाहावे, झुंझलावे नी, बुरो नी माने।6पाप सी खुसी नी हवे, बाकुन छाचाय सी खुसी हवे।7चु आखी वात सेण कर लेय, आखी वातेन भुरसु करे, आखी वातेन आस राखे, आखी वात मां दमधरे।8परम कदी टळे नी; भगवानेन अघी सी आवणे वाळी वात हवसे, ती खत्तम हय जासे; बुली हसे, ती जाती रवसे; अक्कल हसे, ची सर जासे9काहाकी हामरु अक्कल आधीत छे, ने हामरी भगवानेन अघी सी आवणे वाळी वात आधी छे;10बाकुन जत्यार माहान चुखलु आवसे, ती अदेरु सर जासे।11जत्यार मे पुर्यु हतलु, ती मे पुर्यान तसु बुलतेलु, ने पुर्यान तसु वीच्यार हतलो, पुर्यान तसों मन हतलो, पुर्यान तसी समज हतली; बाकुन जत्यार मटु हय गुयु ती पुर्यान तसी वात छुड़ देदु।12हय हामुक आरस्या मां धुंदळान तसों देखाये, बाकुन हेनी टेमे आंबा-सांबा देखसुन; हीनी टेमे मारु अक्कल अदेरु छे, बाकुन हीनी टेमे असु पुरी रीत सी उळखीस, जसु मे उळखाय गुयलु छे।13बाकुन हय भुरसु, आस, परम जे तीनु जलमेन छे, बाकुन हींद्रे मां आखा सी मटु परम छे।