जकरयाह2hne_twf

नापे के डोरी के संग एक मनखे

1तब मेंह अपन आघू म एक मनखे ला देखेंव, जऊन ह अपन हांथ म नापे के डोरी ला धरे रिहिस।2तब मेंह ओकर ले पुछेंव, “तेंह कहां जावत हस?” ओह मोला जबाब दीस, “मेंह यरूसलेम ला नापे बर जावत हंव ताकि पता चलय कि ओकर लम्बई अऊ चौड़ई कतेक हवय।”3जब मोर ले बात करइया स्वरगदूत ह जाय लगिस, त एक आने स्वरगदूत ओकर ले मिले बर आईस4अऊ ओकर ले कहिस: “दऊड़के जा अऊ ओ जवान ले कह, ‘मनखे अऊ पसुमन के बहुंतायत के कारन, यरूसलेम ह बिगर दीवार के सहर हो जाही।5अऊ मेंह खुद येकर चारों कोति आगी के दीवार बन जाहूं,’ यहोवा ह घोसना करत हे, ‘अऊ ओकर भीतर म मेंह ओकर महिमा होहूं।’6“आवव! आवव! उत्तर के देस ले भाग जावव,” यहोवा ह घोसना करत हे, “काबरकि मेंह तुमन ला अकास के चारों दिग के हवा म तितिर-बितिर कर दे हंव,” यहोवा ह घोसना करत हे।7“हे सियोन! आ, तें जऊन ह बेटी बेबिलोन म रहिथस, बचके भाग निकल!”8काबरकि सर्वसक्तिमान यहोवा ह ये कहत हे: “महिमामय परमेसर ह मोला ओ जातिमन के बिरूध म पठोय हवय, जऊन मन तुमन ला लूट ले हवंय—काबरकि जऊन ह तुमन ला छूथे, ओह ओकरआंखी के पुतली ला छूथे—9मेंह खचित ओमन के बिरूध अपन हांथ उठाहूं ताकि ओमन के गुलाममन ओमन ला लूटंय। तब तुमन जानहू कि सर्वसक्तिमान यहोवा ह मोला पठोय हवय।10“हे बेटी सियोन, चिचिया अऊ आनंद मना। काबरकि मेंह आके तोर बीच म निवास करहूं,” यहोवा ह घोसना करत हे।11“ओ दिन बहुंत अकन जातिमन यहोवा के संग मिल जाहीं अऊ मोर मनखे बन जाहीं। मेंह तोर बीच म निवास करहूं अऊ तेंह जान जाबे कि सर्वसक्तिमान यहोवा ह मोला तोर करा पठोय हवय।12यहोवा ह पबितर देस म यहूदा ला अपन भाग के रूप म ले लीही अऊ यरूसलेम ला फेर चुन लीही।13हे जम्मो मनखेमन, यहोवा के आघू म सांत रहव, काबरकि ओह खुद अपन पबितर निवास ले ठाढ़ होय हवय।”