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तलाक क बारा ईशु की शिक्षा

1जव ईशु यी वात कय त्योकियो, तो गलील सी जात रयो; आरू यहूदिया क सिमा जु यरदन नदी पार आयो।2आरू मटलो गर्दी ओको पछोळ हुय लेदा, आरू ईशु उन लोगहन क वा सी आरगो करियो।3तव फरीसि ओकी पारख करने करीन पास आवीन कयनो लाग गिया, “काय हर कारण सी घर वाली क छुड़नो वारू छे?”4ईशु जवाब दिदो, “काय तुमू नी भणिया, की जो उको बनायो, त्योत् शुरू सी नर आरू नारी करीन बनावीन कयो,5‘इना कारण सी मानुस आपसा माय बास सी अलग हुईन आपसी लाड़ी क साथ मा रहवसे आरू त्या दुयू एक डील हुयसे?’6त्या दुय नी, बाकुन एक डील छे अतरानकरीन करीन जिना क यहोवा–भगवान जुड़ियो, मानुस उको अलग नी करनो जुवे।”7त्या ईशु सी कयो, “तव मूसा काय क यी वात टाकियो कि छुड़ने पत्री दीन छुड़ देय?”8ईशु उन लोगहन सी कयो, “मूसा तुमरा मनन वातड़ी वातन क कारण सी तुमूक तुमरी लाड़ी क छुड़ देने करीन हक दियो, बाकुन शुरू मा असो नी हुतो।”9आरू हाव तुमरे सी कहवो, “कि जो कोय व्यभिचार क छुड़ीन आरू काहय कारण सी आपसी लाड़ी क छुड़ देय, आरू दिसरी सी इहाव करे, त्यो व्यभिचार करे; आरू जो उनी छुटली सी इहाव करे, त्यो भी व्यभिचार करे।”10चेला उका सी कयो, “कदाम ओदमी क बाई जात क साथ मा असो सम्बन्ध छे, तो इहाव करनो वारू नी हय।”11त्यो उका सी कयो, “सब यो वचन नी मान सके, त्योत् मान सके जिनाक यो दान मुवलो छे।12काहकि काहय नपुंसक असा छे जो मायन पेट सी असा पैदा हुया; आरू काहय नपुंसक असा छे, जिन क मानुस नपुंसक बनायो: आरू काहय नपुंसक असा छे, जो सोरगदूत राज क करता आपसा क नपुंसक बनाड़े, जो मान सके त्यो माने।”

पोर्‍या क सय बरकत

13तव लोगहन पोर्‍या क ओका पास मा लाया, कि ईशु उन पर हाथ मेलीन प्रार्थना करे; पर चेला पोर्‍या क लावने वाला क लड़िया।14ईशु कयो, “नानला पोर्‍या क म्हार पास आवने देयो। आरू उना क मना मा करो, काहकि सोरग राज असलान क छे।”15आरू ईशु पोर्‍या मुनका पर हाथ मेलीन, वा सी चली गियो।

जवान धनी मानुस

16आरू एक मानुस ईशु क पास आवीन कयो, “ए गुरू, हाव काहलो वारलो काम करो, कि अमरकाय जीवन मुवे?”17ईशु ओका सी कयो, “तु म्हार सी वारला न बाराम कायको पुछे? भलो तो एकुत छे; पर कदाम तु जीवन मा जानो चाह्यो रियो, तो हुकुम क मानिया कर।”18जवान मानुस ईशु कयो, “काहली हुकुम?” ईशु कयो, “यो कि हत्या नी करनो, व्यभिचार नी करनो, चुरी नी करनो, झुटी गवाय नी देनो;19आपसा बास आरू आपसी माय क विजुत करजी, आरू आपसा पड़ोसी सी आपसेन जसो मोंग राखजी।”20त्यो जवान कयो, “इनी सब वातन क तो हाव नानलोतीन मानतो आयो अब मार मा काहली वात की कमी छे?”21ईशु जवान क कयो, “कदाम तु सिद्ध हुयनो चाह्यो रयो; तो जा, थारो सब काय वेचीन गरीब लोगहन क वाट दे; आरू तुखे सोरग मा धन मुवसे; आरू आवीन म्हार पछोळ हुय ले।”22यो सोमवीन त्यो जुवान क चेहरो दुःखी हईन जात रयो, काहकि त्यो बैस धन क मालिक हुतो।23तव ईशु आपसा चेला सी कयो, “हाव तुमरे सी सच कहवो, कि धनवान क सोरग राज मा भरायनो वातड़ो छे।24पछु तुमरे सी कहवो, कि यहोवा–भगवान क राज मा धनवान क भरायने सी उटड़ा क सुवीन गाळा सी निकली जानो सरल छे।”25यो सोमवीन, चेला बैस घबराईन कयो, “पछु कुनीन उध्दार हुयसे?”26ईशु चेलान क आरू देखीन कयो, “मानसो सी तो नी हुय सके, बाकुन यहोवा–भगवान सी सब काय हुय सके।”27इना पर पतरस ईशु सी कयो, “देख, हामु सब काय छुड़ीन थारे पछोळ हुय लेदो तो हामु काय मुवसे?”28ईशु चेला सी कयो, “हाव तुमरे सी सच कहवो, कि नवली उबजन मा जव मनुसक पोर्‍यो आपसी महिमा क साथ मा राजगाद्दी पर बठसे, तो तुमू भी जो म्हार पछोळ हुय लेदा, बारा राजगाद्दी पर बठीन इस्राएल क बारा वंश क न्याय करसे।”29हर एक जन जो मार करता, घर भाई–बहिनीस, माय बास, अवलियाद या खेत क छुड़ देय, उको सौ गुना फव मुवसे, आरू त्यो अमरकाय जीवन क हकदार हुयसे।30बाकुन बैस सब जो पेहला छे, पछला हुसे; आरू जो पछला छे, पेहला हुयसे।