1तब योना न बड़ी मच्छी को पेट म सी अपनो परमेश्वर यहोवा सी प्रार्थना कर क् कह्यो,2“मय संकट म पड़्यो हुयो परमेश्वर ख पुकारयो,अऊर ओन मोरी सुन ली हय;मय न मदत लायी अधोलोक को अन्दर सी पुकारयो,अऊर तय न मोरी सुन ली।3तय न मोख गहरोसमुन्दर की गहरायी तक डाल दियो;अऊर मय धारावों को बिचमच पड़्यो होतो,तोरी भड़कायी हुयी सब तरंगें अऊर लहर मोरो ऊपर सी बह गयी।4तब मय न कह्यो, ‘मय तोरो आगु सी निकाल दियो गयो हय,फिर भी मय तोरो पवित्र मन्दिर ख कसो देखूं?’5मय पानी सी यहां तक घिरयो हुयो होतो; की मोरो जीव निकल्यो जात होतो;गहरो समुन्दर मोरो चारयी तरफ होतो,अऊर मोरो मुंड म कायी लपट्यो हुयो होतो।6मय पहाड़ी की जड़ तक पहुंच गयो होतो;मय हमेशा को लायी जमीन म बन्द भय गयो होतो;फिर भी हे मोरो परमेश्वर यहोवा,तय न मोरो जीव ख गड्डा म सी निकाल्यो हय।7जब मोरो जीवन खतम होन वालो होतो, तब मय न परमेश्वर ख याद करयो;अऊर मोरी प्रार्थना तोरो जवर बल्कीतोरो पवित्र मन्दिर म पहुंच गयी।8जो लोग बेकार कि चिजों पर मन लगावय हय,हि अपनो अनुग्रह करन वालो परमेश्वर ख छोड़ देवय हय।9पर मय धन्यवाद को गीत गाय क तोख बलिदान चढ़ाऊं;जो मन्नत मय न मानी,ओख पूरी करूं।उद्धार परमेश्वर सीच होवय हय!”10तब परमेश्वर न बड़ी मच्छी ख आज्ञा दियो, अऊर ओन योना ख समुन्दर को किनार पर उगल दियो।