1तब नामात के रहइया सोपर ह जबाब दीस:2“मोर बियाकुल बिचार ह मोला उकसावत हे कि मेंह जबाब दंवकाबरकि मेंह बहुंत असांत हंव।3मेंह एक डांट सुनेंव, जेकर ले मोर अपमान होथे,अऊ मोर समझ ह जबाब देय बर मोला उकसावत हे।4“खचित तेंह जानत हस कि पुराना जमाना ले येह कइसे हवय,याने जब ले धरती के ऊपर मनखे के सिरिस्टी करे गीस,5दुस्टमन के खुसी ह थोरकून समय के अय,अऊ भक्तिहीन मनखेमन के आनंद छिन भर के होथे।6हालाकि भक्तिहीन मनखे के घमंड ह अकास तक हबरथेअऊ ओकर मुड़ ह बादरमन ला छूथे,7पर ओह अपन खुद के संडास सहीं सदाकाल बर नास हो जाही;जऊन मन ओला देखे रिहिन, ओमन पुछहीं, ‘ओह कहां हवय?’8सपना कस ओह उड़ जाथे, अऊ फेर कभू नइं मिलय,रात के एक दरसन कस ओह दूरिहा हो जाही।9जऊन आंखी ह ओला देखे रिहिस, ओह ओला फेर नइं देखही;ओह अपन जगह म फेर नइं देखे जाही।10ओकर लइकामन गरीबमन ले दया के आसा करहीं;ओकर खुद के हांथमन ओकर धन वापिस दीहीं।11जऊन जवानी के बल ह ओकर हाड़ामन म भरे रहिथे,ओह ओकर संग धुर्रा म मिल जाही।12“हालाकि बुरई ह ओकर मुहूं म मीठ लगथेअऊ ओह ओला अपन जीभ के तरी म लुकाके रखथे,13हालाकि ओह ओला छोंड़े बर नइं चाहयअऊ ओला अपन मुहूं म रखे रहिथे,14तभो ले ओकर जेवन ह पेट म करू हो जाही;येह ओकर भीतर म सांप के जहर हो जाही।15जऊन धन ला ओह लील ले रिहिस, ओह ओला निकाल दीही;परमेसर ह ओला ओकर पेट म ले उल्टी करवा दीही।16ओह सांपमन के जहर ला चुहकही;जहरिला सांप के दांतमन ओला मार डारहीं।17ओह ओ झरना अऊ नदियामन के आनंद नइं उठा सकही,जेमा मंधरस अऊ दही के धार बोहावत हवय।18जेकर बर ओह कठोर मेहनत करिस, ओला बिगर खाय ओह वापिस करही;ओह अपन धंधा ले मिले लाभ के आनंद नइं उठा सकही।19काबरकि ओह कंगालमन ऊपर अतियाचार करे हवय अऊ ओमन ला बेसहारा छोंड़ दे हवय;ओह ओ घरमन ला हड़प ले हवय, जऊन ला ओह नइं बनाय रिहिस।20“खचित, ओकर लालसा के कभू अन्त नइं होवय;ओह अपन धन के दुवारा अपनआप ला नइं बंचा सकय।21खाय बर ओकर लिये कुछू नइं बांचे हवय;ओकर अमीरी ह बने नइं रहय।22ओकर धन अऊ सफलता के समय म ओला दुख ह घेर लीही;दुरगति के जम्मो चीज ओकर ऊपर आ पड़ही।23जब ओह अपन पेट ला भर चुके होही,तभे परमेसर ह अपन भारी रिस ला ओकर ऊपर देखाहीअऊ ओकर ऊपर दुख ही दुख लानही।24हालाकि ओह लोहा के हथियार ले बच निकलथे,फेर कांस के बान ह ओला छेद डारथे।25ओह ये बान ला तीरके ओकर पीठ ले निकालथे,चिकचिकावत छोर ह ओकर करेजा ले बाहिर निकलथे।ओकर ऊपर आतंक छा जाही;26ओकर धन-संपत्ति बर घिटके अंधियार ह बाट जोहथे।बिगर हवा के बरत आगी ह ओला भसम कर दीहीअऊ ओकर डेरा म बांचे चीजमन ला नास कर दीही।27अकास ह ओकर अपराध ला परगट करही;धरती ह ओकर बिरोध म ठाढ़ होही।28पानी के बाढ़ ह ओकर घर ला बोहाके ले जाही,परमेसर के रिस के दिन ओकर पूंजी ह बोहा जाही।29परमेसर ह दुस्ट मनखे के हालत अइसने करथे,परमेसर कोति ले ओमन बर ये किसम के उत्तराधिकार ठहिराय गे हवय।”