1“गला फारके चिचियावव, दबाके झन रखव।तुरही के सहीं अपन अवाज ला ऊंचहा करव।मोर मनखेमन ला ओमन के बिदरोह के काम बताववअऊ याकूब के संतानमन ला ओमन के पाप जता दव।2काबरकि ओमन रोज-रोज मोर मेर आथें;अइसे लगथे कि ओमन मोर रसता ला जाने बर उत्सुक हवंय,मानो ओमन एक अइसे जाति अंय, जऊन ह सही काम ला करथेअऊ अपन परमेसर के हुकूममन ला नइं छोंड़े हवय।ओमन मोला सिरिप फैसला के बारे म पुछथेंअऊ परमेसर बर उत्सुक जान पड़थें कि ओह ओमन के लकठा म आवय।3ओमन कहिथें, ‘का कारन ए कि हमन तो उपास राखेंन,पर तेंह येला नइं देखे?का कारन ए कि हमन अपनआप ला नम्र करे हन,पर तेंह धियान नइं दे हस?’“काबरकि उपास के दिन म तुमन अपन मन मुताबिक करथवअऊ अपन बनिहारमन के सोसन करथव।4तुम्हर उपास ह लड़ई-झगराअऊ एक-दूसर ला मुक्का मारके झगरा करे म खतम होथे।जइसन उपास तुमन आजकल रखथव, वइसन झन रखव,अइसन उपास रखके तुमन आसा करथव कि तुम्हर अवाज ला ऊपर म सुने जाही।5का ये किसम के उपास ले में खुस होथंव,कि सिरिप एके दिन बर मनखेमन अपनआप ला दीन करंय?का येह, नरकट पऊधा सहीं कोनो मनखे के सिरिप अपन मुड़ ला झुकाना ए?अऊ सिरिप बोरा के ओनहा अऊ राख म लेटना ए?का येला तुमन उपास कहिथव,एक अइसन दिन, जेला यहोवा स्वीकार करथे?6“का येह ओ किसम के उपास नो हय, जेकर ले में खुस होथंव:कि अनियाय के बंधना ला टोर दिये जावयअऊ जुड़ा के बंधना ला खोलकेअतियाचार सहइयामन ला सुतंतर कर दिये जावयअऊ हर एक जुड़ा ला टोर दिये जावय?7का येह ओ किसम के उपास नो हय, कि भूखन मन के संग खाना बांटे जावयअऊ गरीब घुमंतू ला आसरय दिये जावय—जब तुमन नंगरामन ला देखथव, त ओमन ला ओनहा पहिरावव,अऊ अपन खुद के रिस्तेदारमन ले मुहूं झन मोड़व?8तब तुम्हर अंजोर ह बिहान पहाय सहीं चमकही,अऊ तुम्हर चंगई ह जल्दी दिखही;तब तुम्हर धरमीपन ह तुम्हर आघू-आघू जाही,अऊ यहोवा के तेज ह तुम्हर पाछू तुम्हर रकछा करही।9तब तुमन पुकारहू, अऊ यहोवा जबाब दीही;तुमन मदद बर बिनती करहू, अऊ ओह कहिही: में इहां हंव।“यदि तें अंधेर करई के जुड़ा के संगअंगरी उठई अऊ दुस्ट बात करई के आदत ला छोंड़ देबे,10अऊ यदि तें भूखन मनखे के सहायता करबेअऊ दीन दुखीमन के दुख ला दूर करबे,तब अंधियार म तोर अंजोर ह चमकही,अऊ तोर रथिया ह मंझनियां सहीं अंजोर हो जाही।11यहोवा हमेसा तोर अगुवई करही;ओह सूखा भुइयां म तोर जरूरत ला पूरा करहीअऊ तोर हाड़ामन ला मजबूत करही।तें बने पानी पलोय एक बारी सहीं होबे,अऊ अइसन सोता सहीं होबे, जेकर पानी कभू नइं सूखावय।12तोर मनखेमन पुराना उजरे जगहमन ला फेर बसाहींअऊ पीढ़ी-पीढ़ी ले माढ़े नीवमन म घर बनाहीं;तोला टूटहा दीवारमन ला फेर बनानेवाला,अऊ घरमन के संग गलीमन ला ठीक करनेवाला कहे जाही।13“यदि तें बिसराम दिन ला असुध नइं करबेअऊ मोर ओ पबितर दिन म अपन ईछा पूरा करे के कोसिस नइं करबे,यदि बिसराम दिन ला आनंद के दिनअऊ यहोवा के पबितर दिन मानके आदर करबे,अऊ यदि तें येकर आदर करके ओ दिन अपन मुताबिक नइं चलबेअऊ अपन ईछा पूरा नइं करबे या बेकार बात नइं बोलबे,14त तोला यहोवा के कारन आनंद मिलही,अऊ में तोला देस के ऊंचहा जगह म बिजयी मनखे सहीं चलाहूंअऊ तोर पुरखा याकूब के निज भाग के ऊपज ले तोला भोज खवाहूं।”यहोवा ह ये बात ला कहे हवय।