1“हे द्वीपमन, मोर आघू म चुप रहव!देस-देस के मनखेमन नवां बल पावंय!ओमन आघू म आके बोलंय;आवव, नियाय के जगह म एक संग जूरन।2“कोन ह पूरब दिग ले एक झन ला उभारे हे,अऊ धरमीपन म ओला अपन सेवा बर बलाय हे?ओह जातिमन ला ओकर हांथ म कर देथेअऊ राजामन ला ओकर अधीन कर देथे।ओह अपन तलवार ले ओमन ला धुर्रा,अऊ अपन धनुस ले उड़ियाय भूंसा सहीं कर देथे।3ओह ओमन के पीछा करथे अऊ बिगर हानि के,ओह एक अइसन रसता म आघू बढ़थे, जेमा ओह पहिले कभू नइं गे रिहिस।4कोन ह ये काम करे हवय अऊ येला इहां तक लाने हवयअऊ सुरू ले पीढ़ी-पीढ़ी के मनखेमन ला बलात आय हवय?में, यहोवा—जऊन ह ओमन के सबले पहिली के संगअऊ आखिरी के संग हंव—में ओही अंव।”5द्वीपमन येला देखे हवंय अऊ डरथें;धरती के छोरमन कांपथें।ओमन लकठा म आथें अऊ आघू म आथें;6ओमन एक-दूसर के सहायता करथेंअऊ अपन संगीमन ला कहिथें, “मजबूत बनव!”7लोहार ह सुनार लाअऊ जऊन ह हथौड़ा ले समतल करथेओह लोहा ऊपर हथौड़ा मरइया ला उत्साहित करथे।जोड़नेवाला एक झन ह कहिथे, “येह बढ़िया हे।”आने ह मूरती म खीला ठोंकथे ताकि येह झन गिरय।8“पर हे मोर सेवक, इसरायल,हे मोर चुने गय, याकूब,हे मोर संगी अब्राहम के संतानमन,9मेंह तोला धरती के छोर ले लेंव,मेंह तोला धरती के सबले दूरिहा जगहमन ले बलांय।मेंह कहेंव, ‘तेंह मोर सेवक अस’;मेंह तोला चुने हंव अऊ तोला छोंड़े नइं हंव।10झन डर, काबरकि में तोर संग हवंव;भयभीत झन हो, काबरकि में तोर परमेसर अंव।में तोला मजबूत करहूं अऊ तोर मदद करहूं;अपन धरमी जेवनी हांथ ले में तोला संभाले रहिहूं।11“देख, ओ जम्मो जेमन तोर ले गुस्सा होथेंओमन जरूर लज्जित अऊ कलंकित होहीं;जेमन तोर बिरोध करथेंओमन बेकार अऊ नास हो जाहीं।12तेंह अपन बईरीमन ला खोजबे घलोपर ओमन तोला नइं मिलहीं।जेमन तोर ले लड़ई करथेंओमन नास होके मेटा जाहीं।13काबरकि में यहोवा तोर परमेसर अंवजऊन ह तोर जेवनी हांथ ला धरथेअऊ तोला कहिथे, झन डर;में तोर सहायता करहूं।14हे कीरा सहीं याकूब, झन डर,हे छोटकन इसरायल, झन डर,काबरकि में खुद तोर मदद करहूं,” यहोवा ह घोसना करत हे,तोर छुड़इया, इसरायल के पबितर परमेसर।15देख, मेंह तोला बहुंत दांतमन के संग नवांअऊ तेज कुटनेवाला एक बेलन बनाहूं।तेंह पहाड़मन ला कुटबे अऊ ओमन ला चूर-चूर कर देबे,अऊ पहाड़ीमन ला तें भूंसा सहीं कर देबे।16तें ओमन ला फटकबे, अऊ हवा ओमन ला उड़ियाके ले जाही,अऊ आंधी ओमन ला तितिर-बितिर कर दीही।पर तें यहोवा म आनंदित होबेअऊ इसरायल के पबितर परमेसर म बड़ई मारबे।17“गरीब अऊ जरूरतमंद मनखेमन पानी के खोज करथें,पर पानी कहीं नइं मिलय,ओमन के जीभ ह पीयास के मारे सूखा जाथे।पर में यहोवा ह ओमन ला जबाब दूहूं;में, इसरायल के परमेसर ह ओमन ला छोंड़ नइं देवंव।18में सूखा पहाड़ीमन ले नदीमन लाअऊ घाटीमन के बीच म सोतामन ला बहा दूहूं।मेंह मरू-भुइयां ला तरिया मअऊ सूखा भुइयां ला सोतामन म बदल दूहूं।19मेंह मरू-भुइयां म देवदार, बंबरी, मेंहदी,अऊ जैतून उगाहूं।मेंह उजाड़ जगह म सनोवर,चिनार अऊ गोपेर के रूख इकट्ठा लगाहूं,20ताकि मनखेमन देखंय अऊ जानंय,ओमन बिचार करंय अऊ समझंय,कि येह यहोवा के हांथ के काम अय,अऊ इसरायल के पबितर परमेसर ह येला बनाय हवय।”21“अपन मामला ला लानव,”यहोवा ह कहिथे।“अपन तर्क ला सामने रखव,”याकूब के राजा कहिथे।22“हे मूरतीमन, हमन ला बतावव,कि भविस्य म का होवइया हे।हमन ला पहिले के चीजमन के बारे बताववताकि हमन ओमन ऊपर सोच-बिचार करनअऊ अंतिम बात ला समझन।या होवइया चीजमन के बारे म हमन ला बतावव,23भविस्य म जऊन कुछू होवइया हे, तेला बतावव,तभे हमन जानबो कि तुमन देवता अव।भला या बुरा, कुछू घलो करवताकि हमन भयभीत होवन अऊ डर जावन।24पर तुमन कुछू घलो नो हव,अऊ तुम्हर काममन एकदम बेकार अंय;जऊन ह तुमन ला चाहथे, ओह घिनौना मनखे अय।25“मेंह उत्तर दिग ले एक झन ला उकसाय हंव, अऊ ओह आवत हे—ओह पूरब दिग के अय अऊ मोर नांव के दुहाई देथे।जइसन एक कुम्हार ह माटी ला खुंदथे,वइसन ही ओह हाकिममन ला खुंदही, मानो ओमन गारा अंय।26कोन ह ये बात ला सुरूआत ले बताईस कि हमन ये जानतेंन,या पहिले से कोन ह बताईस कि हमन कहितेंन, ‘ओह सही रिहिस’?ये बात कोनो नइं बताईन,पहिले से येला कोनो नइं बताईस,तोर ले कोनो भी कुछू बात नइं सुनिस।27सबले पहिली मेंह सियोन ला बताएंव, ‘देख, ओमन इहां हवंय!’मेंह यरूसलेम ला सुघर संदेस सुनानेवाला एक संदेसिया देंव।28मेंह खोजथंव, पर उहां कोनो नइं एं—देवतामन के बीच म कोनो सलाह देवइया नइं एं,जब मेंह ओमन ले पुछथंव, त जबाब देवइया कोनो नइं एं।29देखव, ओमन जम्मो के जम्मो गलत अंय!ओमन के काम बेकार अंय;ओमन के ढारे गय मूरतीमन हवा अऊ गड़बड़ी के अलावा अऊ कुछू नो हंय।