1ओ समय म हिजकियाह ह बेमार हो गीस अऊ मरइयाच रिहिस। तब आमोस के बेटा यसायाह अगमजानी ह ओकर मेर गीस अऊ कहिस, “यहोवा ह ये कहत हे: अपन घर-परिवार ला ठीक कर, काबरकि तेंह मरइयाच हस; तोर बेमारी ह ठीक नइं होवय।”2तब हिजकियाह ह भीथी कोति अपन मुहूं करके यहोवा ले पराथना करिस,3“हे यहोवा, सुरता कर कि मेंह कइसे सच्चई अऊ पूरा मन लगाके तोर आघू म चलत आय हंव अऊ ओ काम करे हंव, जऊन ह तोर नजर म सही अय।” अऊ हिजकियाह ह फूट-फूटके रोए लगिस।4तब यहोवा के ये बचन यसायाह करा आईस:5“जा अऊ हिजकियाह ला कह, ‘यहोवा, तोर पुरखा दाऊद के परमेसर ये कहत हे: मेंह तोर पराथना ला सुने हंव अऊ तोर आंसू ला देखे हंव; मेंह तोर उमर पंदरह बछर अऊ बढ़ा दूहूं।6अऊ मेंह तोला अऊ ये सहर ला अस्सूर के राजा के हांथ ले छोंड़ाहूं। मेंह ये सहर के रकछा करहूं।7“ ‘तोर बर यहोवा के ये चिनहां होही कि यहोवा ह अपन कहे बात ला पूरा करही,8धूप के छइहां, जऊन ह आहाज के सीढ़ी के रसता म ढर गे हवय, मेंह दस कदम पाछू कोति लहुंटा दूहूं।’ ” तब ओ छइहां, जऊन ह ढर गे रिहिस, दस कदम पाछू हट गीस।9यहूदा के राजा हिजकियाह के लेख जऊन ला ओह रोगी होके चंगा होय के बाद लिखिस, ओह ये अय:10मेंह कहेंव, “अपन उमर के उत्तम समय मजरूरी अय कि मेंह मिरतू के दुवारमन म ले होके जावंवअऊ मोर बाकि उमर ह खतम हो जावय।”11मेंह कहेंव, “मेंह यहोवा लाजीयतमन के भुइयां म फेर नइं देखहूं;मेंह अपन संगी मनखे ला फेर नइं देखहूं,या ओमन संग नइं रहिहूं, जेमन ये संसार म रहिथें।12मोर घर ला चरवाहामन के तम्बू सहींहटाके मोर ले लेय लिये गे हवय।एक बुनकर सहीं मेंह अपन जिनगी ला लपेट ले हंव,अऊ ओह मोला करघा ले काटके अलग कर दे हवय;एकेच दिन म तेंह मोर अन्त कर डारय।13मेंह धीरज धरके बिहान तक इंतजार करेंव,पर एक सिंह के सहीं ओह मोर जम्मो हाड़ा ला टोर दीस;एकेच दिन म तेंह मोर अन्त कर डारय।14मेंह सूपाबेनी या तूती चिरई सहीं रोयेंव,मेंह बिलाप करइया पंड़की सहीं बिलाप करेंव।मोर आंखीमन ऊपर देखत-देखत कमजोर हो गीन।हे परभू, मोला धमकाय जावत हे; मोर मदद करे बर आ!”15पर मेंह का कह सकत हंव?ओह मोला कहे हवय, अऊ ओह खुद येला करे हवय।मेंह मन के ये पीरा के कारनजिनगी भर नम्र होके चलहूं।16हे परभू, अइसन चीज के दुवारा मनखेमन जीयत रहिथें;अऊ मोर आतमा ला घलो ओमन म जिनगी मिलथे।तें मोला चंगा करयअऊ मोला जीयत रखय।17खचित येह मोर फायदा बर रिहिसकि मेंह अइसन पीरा भोगंय।तेंह मोला मया करकेबिनास के खंचवा ले बचाय हवस;मोर सब पाप ला तेंहअपन पीठ के पाछू म कर दे हवस।18काबरकि कबर ह तोर परसंसा नइं कर सकय,न ही मऊत ह तोर इस्तुति कर सकय;जेमन खाल्हे कबर म परे हवंयओमन तोर बिसवासयोग्यता के आसा नइं कर सकंय।19जीयत मनखे, जीयत मनखे—ओमन तोर परसंसा करथें,जइसन मेंह आज करत हंव;दाई-ददामन अपन लइकामन लातोर बिसवासयोग्यता के बारे बताथें।20यहोवा ह मोर उद्धार करही,अऊ हमन जिनगी भरयहोवा के मंदिर मतारवाला बाजा के संग गीत गावत रहिबो।21यसायाह ह कहे रिहिस, “अंजीर के एक लेप बनावव अऊ हिजकियाह के फोड़ा म लगावव, अऊ ओह ठीक हो जाही।”22हिजकियाह ह पुछे रिहिस, “येकर का चिनहां होही कि मेंह यहोवा के मंदिर म जाहूं?”