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छोंड़ाय गय मनखेमन के आनंद

1मरू-भुइयां अऊ सूखा भुइयां खुस होहीं;निरजन भुइयां ह आनंद मनाही अऊ उहां फूल धरही।मरू-भुइयां ह मगन होके,2केसर के सहीं फूल धरही;येह बहुंत आनंदित होही अऊ आनंद के मारे जय-जयकार करही।लबानोन के महिमा येला दिये जाही,अऊ येकर सोभा करमेल अऊ सारोन के सहीं होही;ओमन यहोवा के महिमा,हमर परमेसर के सोभा ला देखहीं।
3ढीला हांथमन ला मजबूत करव,कमजोर माड़ीमन ला मजबूत करव;4घबरानेवाला मनखेमन ला कहव,“मजबूत बनव, झन डरव;तुम्हर परमेसर ह आहीओह बदला लेय बर आही;ईस्वरीय बदला के संगओह तुम्हर उद्धार करे बर आही।”
5अंधरामन के आंखी खोले जाहीअऊ भैंरामन के कान घलो खोले जाही;6तब खोरवा ह हिरन सहीं कूदहीअऊ कोंदामन अपन जीभ ले आनंद के मारे जय-जयकार करहीं।काबरकि बंजर भुइयां म पानी के सोता फूट निकलहीअऊ मरू-भुइयां म नदी बोहाय लगही;7घाम ले बरत भुइयां ह तरिया बन जाहीअऊ सूखा भुइयां म सोतामन फूटहीं।अऊ एक समय जिहां सियारमन रहत रिहिनउहां घांस अऊ नरकट अऊ सरकंडा जामही।
8अऊ उहां एक राजमार्ग होही;येला पबितरता के रद्दा कहे जाही;ये रद्दा ह ओमन बर होही, जेमन ओ रद्दा म रेंगथें।कोनो असुध जन ओमा ले होके नइं जा सकही;दुस्ट मुरूख मनखेमन येमा ले होके नइं जा सकहीं।9उहां कोनो सिंह नइं होही,अऊ न ही कोनो हिंसक पसु;ये पसुमन उहां नइं मिलहीं।पर सिरिप छोंड़ाय गय मन ओमा रेंगहीं,10अऊ जेमन ला यहोवा ह बचाय हवय, ओमन लहुंटके आहीं।ओमन गीत गावत सियोन म आहीं;सदाकाल के आनंद ह ओमन के मुड़ के मुकुट होही।खुसी अऊ आनंद ले ओमन भर जाहीं,अऊ दुख अऊ पीरा के अन्त हो जाही।