इबरीमन6hne_twf
1एकरसेति आवव, मसीह के बारे म जऊन सुरू के सिकछा ए, ओला छोंड़के हमन ओकर सिकछा म सियान होवत जावन। हमन ये बातमन के नीव फेर झन रखन—जइसने कि ओ काम ले पछतावा करई, जऊन ह हमन ला मिरतू कोति ले जाथे, परमेसर के ऊपर बिसवास करई,2बतिसमा, हांथ रखई, मरे मनखेमन के जी उठई अऊ सदाकाल के नियाय के बारे निरदेस।3अऊ कहूं परमेसर के अनुमति होही, त हमन ये काम घलो करबो।4जऊन मन एक बार परमेसर के अंजोर म आ गे हवंय, स्वरगीय बरदान के सुवाद ला चिख ले हवंय, जऊन मन पबितर आतमा के भागीदार हो गे हवंय,5जऊन मन परमेसर के बचन के भलई अऊ अवइया समय के सक्ति ला जान गे हवंय,6कहूं ओमन बिसवास ले भटक जावंय, त ओमन ला पछताप करे बर वापिस लाना असंभव ए, काबरकि अपन नुकसान करके, ओमन परमेसर के बेटा ला फेर कुरूस म चघावत हवंय अऊ खुलेआम ओकर ऊपर कलंक लगावथें।7परमेसर ह ओ भुइयां ला आसीस देथे, जऊन ह अकसर अपन ऊपर गिरइया बरसात के पानी ला सोंख लेथे अऊ ओमन बर बने फसल उपजाथे, जऊन मन येमा खेती-बारी करथें।8पर ओ भुइयां, जऊन ह कांटा अऊ कंटिली झाड़ी उपजाथे, ओह बेकार ए, अऊ ओकर ऊपर परमेसर ले सराप पाय के खतरा हवय। आखिरी म, येह आगी म बारे जाही।9मयारू संगवारी हो, हालाकि हमन अइसने गोठियावत हन, पर हमन ला तुम्हर बारे म अऊ बने बातमन के भरोसा हवय, जेमन के संबंध उद्धार से हवय।10परमेसर ह अनियायी नो हय; ओह तुम्हर काम ला नइं भुलावय, अऊ ओ मया ला नइं भुलावय, जऊन ला तुमन ओकर मनखेमन के मदद करे के दुवारा ओला देखाय हवव अऊ तुमन अभी घलो ओमन के मदद करत हवव।11हमन चाहथन कि तुमन ले हर एक झन आखिरी तक अइसनेच उत्साह से मेहनत करते रहय, ताकि तुम्हर आसा ह पक्का होवय।12हमन नइं चाहथन कि तुमन आलसी बनव, पर ओमन के नकल करव, जऊन मन बिसवास अऊ धीरज के दुवारा ओ चीज के वारिस बनथें, जेकर वायदा परमेसर ह करे हवय।