1अरु मरा पवित्र भैइहोन तुम जो स्वर्गीय बुलाना मे साती दार हुये, उ प्रेरित अरु परमेश्वर का द्वारा बुलाया गया हइ, तुम अपनो ध्यान यीशु पर लगैइ खे रखनु.2उ जने ओखे चुन्यो वहा परमेश्वर का प्रती विश्वास योग्य थो ठिक असो जसो मूसा ने अपना काम का प्रती परमेश्वर का घराना मे विश्वास-लायक थो.3जसो घर बनानआलो एक इन्सान घर से अधिक खुद आदर को पात्र होस हइ उ रीति से यीशु भी मूसा से अधिक आदर को पात्र मान्यो गयो.4क्युकि हर एक घर खे कोय न कोय बनान आलो होस हइ, पन जेने सब कुछ बनायो उ परमेश्वर हइ.5मूसा तो परमेश्वर का पूरा घर मे सेवक का समान विश्वासयोग्य र्हीयो कि जो बातहोन को वर्णन होन आलो थो, उन की गवय दे. ओने वा बातहोन बोली जो भविष्य मे परमेश्वर का द्वारा बोली जान आली थी.6पन मसीह बेटो होन का नातासे परमेश्वर को घर को अधिकारी हइ; अरु परमेश्वर को घरनो हम हइ, अगर हम हिम्मत पर अरु अपना आस का घमण्ड पर आखरी तक मजबुत से र्हिया.
परमेश्वर का दुन्याहोन को आराम
7येकालिये जसो पवित्र आत्मा बोलस हइ,“अगर आज तुम परमेश्वर की अवाज सुन्ये,8ते अपना मन खे कठोर नी करनु,जसो तुम्हारा बुजुरुखहोन नेजब उनकी मरुस्थल मे परीक्षा हुइ री थी परमेश्वर का खिलाफ बगावत करी थी9परमेश्वर बोलस हइ वहा उनने मरी परिक्षा का तरफ परख्यो अरु मरा कामहोन खे देख्यो जेखे मेने चालीस साल तक देख्यो.10यो कारण मी उ टाइम का दुन्याहोन से गुस्सा र्हियो,अरु बोल्यो इनको मन हमेशा से ही प्रमाणितअरु मरी आज्ञा खे ठुकरान आलाया मरी रस्ता समजे नी हइ.11तब मेने गुस्सा मे अयखे कसम-खैइ,वे मरा आराम स्थान मे कभी प्रवेश करी नी सखे .”12हे भैइ अरु बहीन, चौक्नय र्हेनु कि तुम मे असो बुरो अरु अविश्वासी मन नी होनु, जे तुमखे जिन्दो परमेश्वर से दुर हटैखे लि जाये.13येका बदला जब तक “आज का दिन” बोल्यो जास हइ, तुम हर दिन एक दूसरा खे प्रोत्साहित र्हिया, असो नी हुये कि तुम मे से कोय झन पाप का छल मे अय-खे कठोर हुइ जाये.14क्युकि हम मसीह का भागीदारी हुया हइ, अगर हम अपना पैयला भरोसा पर आखरी तक मजबुत से बन्या र्हिये.15जसो शास्त्र बोलस हइ ,“अगर आज तुम ओको बोल सुन्ये ते अपना मन खे कठोर नीकरनु, जसो कि बगावत का दिनहोनमे तुम्हारा बुजुरुखहोन ने कर्यो थो.”16भलो कोन हइ जेने परमेश्वर की वाणी सुनी अरु उनका खिलाफ बगावत कर्यो? का वे कोन था, जेने मूसा ने मीस्र से बचैइ खे नीकाल्यो थो?17अरु परमेश्वर चालीस साल तक कोनता इन्सान से घुस्सा र्हियो? का उन से जेने पाप कर्यो, अरु उनकी लाश जंगल मे पडि र्हिये?18अरु परमेश्वर कोखा लिये कसम खैइ कि तुम मरा आराम स्थान मे प्रवेश नी करी सखे ? का फक्त उनसे जेने आज्ञा नी मानी?19यो प्रकार हम देखस हइ कि वे अविश्वासी का कारण आराम कि जगा पर प्रवेश नी करी सक्या.