1परमेश्वर को यो वचन मोरो जवर पहुंच्यो :2“हे आदमी की सन्तान,” अपनो लोगों सी कहो, जब मय कोयी देश पर तलवार चलावन लगू अऊर ऊ देश को लोग कोयी ख अपनो पहरेदार कर क् ठहरायेंन,3तब यदि ऊ यो देख क कि यो देश पर तलवार चलावन वालो हय, नरसिंगा फूक क चेतावनी दे,4तब जो कोयी नरसिंगा को आवाज सुन क ओको पर ध्यान नहीं देयेंन अऊर तलवार को आक्रमन सी ऊ मर जायेंन, त ओको खून ओकीच मुंड पर पड़ेंन।5ओन नरसिंगा को आवाज सुन्यो, पर ध्यान नहीं दियो; येकोलायी ओको खून ओकीच मुंड पर पड़ेंन। पर यदि ऊ ध्यान देतो, त अपनो जीव बचाय लेतो।6पर यदि पहरेदार यो देखन पर कि आक्रमन होन वालो हय नरसिंगा फूक क लोगों ख नहीं चिताये, अऊर दुश्मन की तलवार चलन पर उन म सी कोयी मर जाये, त मरन वालो अपनो अधर्म को वजह मर जायेंन, पर मय ओको खून को लायी ऊ पहरेदार ख जिम्मेदार ठहराऊं।7“येकोलायी, हे आदमी की सन्तान, मय न तोख इस्राएल को घराना को पहरेदार ठहराय दियो हय; येकोलायी जो बात मय तोरो सी कहू हय, ओख सुन अऊर उन्ख मोरो तरफ सी सावधान कर।8यदि मय बुरो आदमी सी कहू, ‘हे बुरो आदमी, तय जरूर मरजो,’ तब यदि तय बुरो आदमी को ओको रस्ता को बारे म नहीं चितायजो, कि ऊ अपनो रस्ता बदले, कि ऊ अपनो जीव बचाये, त ऊ पापी होय क मरच जायेंन, अऊर मय ओकी मृत्यु को लायी तोख दोषी ठहराऊं।9यदि तय कोयी बुरो आदमी ख चितायजो, अऊर ऊ पाप करनो नहीं छोड़ेंन, त ऊ पापी होय क मर जायेंन, पर तोरो जीव बचाय लेयेंन।”
व्यक्तिगत जिम्मेदारी
10“फिर हे आदमी की सन्तान, इस्राएल को घराना सी यो कहो, तुम लोग कह्य हय : ‘हमरो अपराधों अऊर पापों को बोझ सी दब्यो हुयो हय अऊर हम ओको वजह नाश होय रह्यो हय; हम कसो जीन्दो रह्य सकजे हय?’11येकोलायी तय उन्को सी यो कह्य, परमेश्वर यहोवा की या वानी आय : मोरो जीवन की कसम, पापियों को मरन सी मोख खुशी नहीं होवय, पर पाप करनो छोड़े अऊर जीन्दो रहे; हे इस्राएल को घराना, तुम अपनो अपनो बुरो रस्ता सी फिर जावो; तुम कहाली मरनो चाहवय हय?12“हे आदमी की सन्तान,” अपनो लोगों सी यो कहो, जब धर्मी जन अपराध करे तब ओको धर्म ओख बचाय नहीं सकेंन, दुष्ट की दुष्टता जो भी होना, जब ऊ ओको सी फिर जाये, त ओख सजा नहीं मिलेंन; अऊर धर्मी जन, यदि ऊ पाप करे, त अपनो अधर्म को वजह नहीं बचेंन।13यदि मय धर्मी सी कहू कि तय जरूर जीन्दो रहजो, अऊर ऊ अपनो धर्म पर भरोसा कर क् कुटिल काम करन लगेंन, तब ओको धर्म को कामों म सी कोयी ख याद नहीं करयो जायेंन; जो ओन कुटिल काम करयो हय ओकोच म फस्यो हुयो मरेंन।14फिर जब मय बुरो आदमी सी कहू, तय जरूर मरजो, पर ऊ अपनो पापों सी मन फिरावय हय अऊर उच करय हय जो सही अऊर न्याय अऊर धर्म को काम करय हय,15यदि बुरो आदमी कर्ज लौटाय दे, अऊर अपनी लूटी हुयी चिज वापस दे दे, बिना कुटिल काम करयो जीवनदायक विधियों पर चलन लगेंन, त ऊ नहीं मरेंन; ऊ जरूर जीन्दो रहेंन।16जितनो पाप ओन करयो हय, उन म सी कोयी ख याद नहीं करयो जायेंन; ओन न्याय अऊर धर्म को काम करयो हय ऊ जरूर जीन्दो रहेंन।17“तब भी तुम्हरो लोग कह्य हय, प्रभु को व्यवहार ठीक नहाय; पर उन्कोच व्यवहार ठीक नहाय।18जब धर्मी अपनो धर्म सी फिर क कुटिल काम करन लगेंन, त ऊ ओको वजह जरूर मरेंन।19जब बुरो आदमी अपनी दुष्टता सी फिर क न्याय अऊर धर्म को काम करन लगेंन, तब ऊ उन्को वजह जीन्दो रहेंन।20हे इस्राएल तब भी तुम कह्य हय, ‘प्रभु जो करय हय ठीक नहाय?’ पर मय हर एक आदमी को न्याय ओको कामों को अनुसार करूं।”
यरूशलेम को विनाश को समाचार
21फिर हमरो बन्धुवायी को ग्यारहवों साल को दसवों महिना को पाचवों दिन ख, एक आदमी जो यरूशलेम सी भग क बच गयो होतो, ऊ मोरो जवर आय क कहन लग्यो, “यरूशलेम नगर नाश भय गयो।”22ऊ आदमी को आवन सी पहिली शाम ख परमेश्वर की सामर्थ मोरो पर प्रबल भयी होती; जब ऊ आदमी सुबेरे आयो, तब ओन मोरो मुंह खोल दियो; अऊर मोरो मुंह; खुल गयो, अऊर मोरो मूक्कापन दूर भय गयो।
लोगों को पाप
23तब परमेश्वर को यो वचन मोरो जवर पहुंच्यो :24“हे आदमी की सन्तान, इस्राएल की जमीन को उन खण्डरों म रहन वालो यो कह्य हय, ‘अब्राहम त एकच आदमी होतो, तब भी देश को अधिकारी होतो; पर हम बहुत सो लोग हय, येकोलायी देश हमरोच अधिकार म दियो गयो हय।’”25“यो वजह तय उन्को सी कह्य, परमेश्वर यहोवा यो कह्य हय : तुम लोग खून समेत मांस खावय हय अऊर अपनी मूर्तियों को तरफ नजर कर क् हत्या करय हय; तब का तुम ऊ देश पर अधिकार कर पावों?26तुम अपनी तलवार पर भरोसा करय हय, तुम घृणित काम करय हय, अऊर अपनी पड़ोसी की पत्नि ख अशुद्ध करय हय : तब का तुम ऊ देश पर अधिकार कर सको?”27तय उन्को सी यो कह्य, परमेश्वर यहोवा यो कह्य हय : मोरो जीवन की कसम, जो लोग उजड़्यो हुयो नगर म रह्य हय, हि तलवार सी मारयो जायेंन, अऊर जो खुलो मैदान म रह्य हय, उन्ख मय जंगली जनावर को आहार बनाय देऊं, अऊर जो पहाड़ी अऊर गुफावों म रह्य हय, हि महामारी सी मरेंन।28मय ऊ देश ख उजाड़च उजाड़ कर देऊं; अऊर जो शक्ति पर हि घमण्ड करत होतो ओको अन्त होय जायेंन; अऊर इस्राएल देश को पहाड़ इतनो उजाड़ होय जायेंन कि वहां सी होय क कोयी भी नहीं जायेंन।29येकोलायी जब मय उन लोगों को लायी सब करयो गयो घिनौनो कामों को वजह ऊ देश ख उजाड़च उजाड़ कर देऊं, तब हि जान लेयेंन कि मय परमेश्वर आय।
भविष्यवक्ता को सन्देश को परिनाम
30“हे आदमी की सन्तान, तोरो लोग दीवालों को जवर अऊर घरों को दरवाजा म तोरो बारे म बाते करतो हुयो एक दूसरो सी कह्य हय, ‘आवो अऊर ऊ सन्देश ख सुनो, कि परमेश्वर को तरफ सी कौन सो वचन निकलय हय।’31हि प्रजा को समान आवय हय अऊर मोरी प्रजा बन क तोरो सामने बैठ क तोरो वचन सुनय हंय, पर हि उन पर चलय नहाय; मुंह सी त हि बहुत प्रेम दिखावय हंय, पर उन्को मन लालच मच लग्यो रह्य हय।32तय उन्की नजर म प्रेम को मधुर गीत गावन वालो अऊर बजावन वालो ठहरयो हय, कहालीकि हि तोरो वचन सुनय त हंय, पर उन पर चलय नहाय।33येकोलायी जब या बात पूरी होयेंन, अऊर वा जरूर पूरी होयेंन! तब हि जान लेयेंन कि हमरो बीच एक भविष्यवक्ता आयो होतो।”