1नववों साल को दसवों महिना को दसवों दिन ख, परमेश्वर को यो वचन मोरो जवर पहुंच्यो :2“हे आदमी की सन्तान,” अज को दिन लिख क रख, कहालीकि “अज को दिनच बेबीलोन को राजा न यरूशलेम नगर ख घेर लियो होतो।”3यो विद्रोही घराना सी दृष्टान्त कह्य; प्रभु परमेश्वर कह्य हय :हन्डा ख आगी पर रख देवो;ओख रख क ओको म पानी डाल देवो;4तब ऊ हन्डा म जांघ अऊर कन्धा अऊर सब अच्छो अच्छो मांस कोतुकड़ा डाल देवो;अऊर ओको म अच्छी अच्छी हड्डियां भी भर देवो।5झुण्ड म सी सब सी अच्छोजनावर लेवो तब उन हड्डियों को लायीहन्डा को खल्लो लकड़ियों को ढेर करो;अऊर मांस ख खूब उबालो ताकी अन्दर की हड्डी भी पक जायेंन।6येकोलायी प्रभु परमेश्वर यो कह्य हय : धिक्कार हय, वा हत्यारी नगरी पर! धिक्कार हय ऊ हन्डा पर! जेको म जंग लग्यो हय अऊर निकल्यो नहीं; ओको म सी एक एक तुकड़ा कर क् निकाल लेवो, ओको पर चिट्ठी डालन की जरूरत नहाय।7कहालीकि वा नगरी म करयो हुयो खून अपनोच बीच करयो हय; ओन खून ख जमीन पर डाल क धूल सी नहीं झाक्यो, पर नंगी चट्टान पर डाल दियो हय।8येकोलायी मय न भी ओको खून नंगी चट्टान पर रख्यो हय कि ऊ झाक नहीं सके कि बदला लेन ख जलजलाहट भड़के।9प्रभु परमेश्वर यो कह्य हय : “धिक्कार हय वा खूनी नगरी पर! मय भी जलाऊ लकड़ी को ढेर ख बड़ो करूं।10अऊर जादा लकड़ी डालो, आगी ख भड़कावो, अऊर मसाला मिलाय क मांस ख अच्छो तरह सी पकावों, अऊर हड्डियां जलाय देवो।11तब खाली हन्डा ख आगी पर रख जेकोसी ऊ गरम हो अऊर ओको पीतल लाल हो अऊर ओको मयील गल जाय, अऊर ओको जंग जर जाये।12मय ओको वजह मेहनत करतो करतो थक गयो, पर ओको भारी जंग निकल्यो नहीं, ओको जंग आगी सी भी निकल्यो नहीं।13हे यरूशलेम नगरी तोरो अनैतिक कामों न तोख अशुद्ध कर दियो हय। मय न त तोख शुद्ध करन की कोशिश करी, पर तय शुद्ध नहीं भयी, यो वजह जब तक मय अपनी जलजलाहट तोरो पर शान्त नहीं कर लेऊ, तब तक तय फिर सी शुद्ध नहीं होयजो।14मय परमेश्वर नच यो कह्यो हय; अऊर ऊ जरूर होय जायेंन; मय असोच करूं, मय तोख नहीं छोड़ू, नहीं तोरो पर तरस खाऊं, नहीं पछताऊं; तोरो चालचलन अऊर कामों को अनुसार तोरो न्याय करयो जायेंन, प्रभु परमेश्वर की या वानी हय।”
यहेजकेल की पत्नि की मृत्यु
15परमेश्वर को यो वचन मोरो जवर पहुंच्यो :16“हे आदमी की सन्तान, देख, मय तोरो ऊ व्यक्ति ख छीन लेऊं जेख तय बहुत प्रेम करय हय; नहीं शोक करजो नहीं तय रोयजो नहीं तय आसू बहायजो।17लम्बी स्वास लेजो, पर वा सुनायी नहीं दे; मरयो हुयो को लायी भी शोक मत करजो। मुंड पर फेटा बान्ध्यो अऊर पाय म जूता पहिन्यो रहजो; अऊर नहीं ओठों ख मत झाकजो नहीं शोक करन वालों को प्रथा को अनुसार जेवन मत करजो।”18तब मय न सुबेरे लोगों सी बाते करी, अऊर शाम ख मोरी पत्नि मर गयी। तब सुबेरे मय न वसोच करयो जसो मोख आज्ञा दी गयी होती।19तब लोग मोरो सी कहन लग्यो, “का तय हम्ख नहीं बतायजो कि यो जो तय करय हय, येको हम लोगों को लायी का अर्थ हय?”20मय न उन्ख उत्तर दियो, “परमेश्वर को यो वचन मोरो जवर पहुंच्यो :”21तय इस्राएल को घराना सी कह्य : प्रभु परमेश्वर यो कह्य हय : देखो, मय अपनो पवित्र जागा ख जो मजबूत गढ़ जेको पर तुम घमण्ड करय हय; जो तुम्हरी आखी को तारा हय, अऊर जेख तुम्हरो मन चाहवय हय, ओख मय अपवित्र करन पर हय; अऊर तुम्हरो टुरा-टुरियां जो यरूशलेम म रह्य गयो हय, हि तलवार सी मारयो जायेंन।22जसो मय न करयो हय वसोच तुम लोग भी करो; तुम भी अपनो ओंठ मत झाको, नहीं शोक को लायक रोटी खावो।23तुम मुंड पर फेटा बान्ध्यो अऊर पाय म जूता पहिन्यो रहो, नहीं छाती पीटो, बल्की अपनो अधर्म को कामों म फस्यो हुयो गलतो जावो अऊर एक दूसरो को तरफ देख क विलाप करो।24यो रीति सी यहेजकेल तुम्हरो लायी चिन्ह ठहरेंन; जसो ओन करयो, ठीक वसोच तुम भी करो। जब या बाते होय जायेंन, तब तुम जान लेवो कि मय परमेश्वर यहोवा आय।25“हे आदमी की सन्तान, का यो सच नहाय, कि जो दिन मय उन्को मजबूत गढ़, उन्की शोभा, अऊर हर्ष को कारन अऊर उन्को टुरा-टुरियां जो उन्की शोभा, उन्की आखी की खुशी, अऊर मन की इच्छा हय, उन्ख मय छीन लेऊं,26उच दिन जो व्यक्ति भग क बचेंन, ऊ तोरो जवर आय क तोख समाचार सुनायेंन।27उच दिन तोरो मुंह खुलेंन, अऊर फिर तय चुप नहीं रहजो पर ऊ बच्यो हुयो को संग बाते करजो। यो तरह तय इन लोगों को लायी चिन्ह ठहरजो; अऊर यो जान लेयेंन कि मय परमेश्वर आय।”