यहेजकेल10lbm_twf

परमेश्वर की सामर्थ यरूशलेम को मन्दिर सी निकल जानो

1येको बाद मय न देख्यो कि करूबों को मुंड को ऊपर जो आकाश मण्डल हय, अऊर यो आकाश मण्डल म सिंहासन जसो कुछ हय, जो नीलमनि को जसो चमक रह्यो हय।2तब परमेश्वर न ऊ सन को कपड़ा पहिन्यो हुयो आदमी सी कह्यो, “घूमन वालो चक्का को बीच करूबों को खल्लो जा अऊर अपनी दोयी मुट्ठियों म पंख धारी प्रानी को बीच म सी आगी उठाव अऊर यरूशलेम नगर पर बगराय दे।” ऊ मोरो देखतो हुयो उन्को बीच म गयो।3जब ऊ आदमी अन्दर गयो, तब हि करूब, भवन को दक्षिन दिशा को तरफ खड़ो होतो; अऊर बादर अन्दर को आंगन म समाय गयो।4तब परमेश्वर को तेज करूबों को ऊपर सी उठ क भवन की डेहरी पर आय गयो; अऊर बादर भवन म भर गयो; अऊर ऊ डेहरी परमेश्वर को तेज को महिमा सी भर गयो।5करूबों को पंखा को आवाज बाहेर को आंगन तक सुनायी देत होतो, ऊ सर्वशक्तिमान परमेश्वर को बोलन को जसो शब्द होतो।6जब ओन सन को कपड़ा पहिन्यो हुयो आदमी ख घूमन वालो चक्का को अन्दर करूबों को बीच म सी आगी लेन की आज्ञा दी, तब ऊ उन्को बीच म जाय क एक चक्का को जवर खड़ो भयो।7तब करूबों को बीच म सी एक करूब न अपनो हाथ बढ़ा क, वा आगी म सी जो करूबों को बीच म होती, कुछ उठाय क सन को कपड़ा पहिन्यो हुयो आदमी की मुट्ठी म दे दियो; अऊर ऊ ओख ले क बाहेर चली गयो।8करूबों को पंखा को खल्लो त आदमी को हाथ को जसो कुछ दिखायी देत होतो।9तब मय न देख्यो, कि करूबों को जवर चार चक्का हय; मतलब एक एक करूब को जवर एक एक चक्का हय, अऊर चक्का को रूप किमती चमकीलो गोटा को जसो हय।10उन्को असो रूप हय, कि चारयी एक जसो दिखायी दे रह्यो हंय, जसो एक चक्का को बीच दूसरो चक्का हय।11जब हि चलत होतो तब चारयी दिशावों म हि बिना मुड़्यो चलत होतो; पर सामने को चक्का जो दिशा म चलत होतो, बाकी चक्का ओको पीछु पीछु चलत होतो, अऊर चलतो समय हि मुड़त नहीं होतो।12मय न देख्यो की करूबों को पूरो शरीर पीठ, हाथ अऊर पंखा म अऊर जो चक्का उन्को हय, उन म भी सब को सब चारयी तरफ आंखीच आंखी हय,13मोरो सुनतो हुयो इन चक्का ख चक्कर कह्यो गयो, मतलब घुमन वालो चक्का।14एक एक को चार चार मुंह होतो : एक मुंह त करूब को जसो, दूसरो मुंह आदमी को जसो, तीसरो मुंह सिंह को जसो, अऊर चौथो मुंह उकाब पक्षी को जसो होतो।15करूब जमीन पर सी ऊपर उठ गयो। हि योच जीवधारी हय जो मय न कबार नदी को जवर देख्यो होतो।16जब करूब चलत होतो तब तब हि चक्का उन्को जवर जवर चलत होतो; अऊर जब जब करूब धरती पर सी ऊपर उड़न लायी पंख फैलावत होतो तब तब चक्का उन्को जवर सी मुड़त नहीं होतो।17जब हि खड़ो होत होतो; तब चक्का भी खड़ो होय जात होतो; अऊर जब हि ऊपर उठय हय तब हि भी उन्को संग उठत होतो; कहालीकि इन जीवधारियों की आत्मा उन्म भी होती।18परमेश्वर की सामर्थ भवन को दरवाजा सी बाहेर निकल्यो अऊर करूबों को ऊपर ठहर गयो।19तब करूब अपनो पंख फैलाय क मोरो देखतो देखतो धरती पर सी उठ क निकल गयो; अऊर चक्का भी उन्को संग संग गयो, अऊर हि सब परमेश्वर को भवन को पूर्व दिशा को फाटक म खड़ो भय गयो; अऊर इस्राएल को परमेश्वर को तेज उन्को ऊपर रुक्यो रह्यो।20हि योच जीवधारी आय जो मय न कबार नदी को जवर इस्राएल को परमेश्वर को आसन को खल्लो देख्यो होतो, अऊर मय न जान लियो कि हि करूब आय।21हर एक को चार मुंह अऊर चार पंखा को खल्लो आदमी को जसो हाथ भी होतो।22उन्को मुंह को रूप उच हय जो मय न कबार नदी को किनार पर देख्यो होतो। उन्को मुंहच नहीं बल्की शरीर भी वसोच होतो। हि सीधो सामने को तरफ चलत होतो।