1मूसा न इस्राएलियों की पूरी मण्डली ख जमा कर क् उन्को सी कह्यो, “जिन कामों ख करन की आज्ञा परमेश्वर न दियो हय हि या हंय।2छय दिन त काम-काज करयो जाये, पर सातवों दिन तुम्हरो लायी पवित्र अऊर परमेश्वर लायी परम आराम को दिन ठहरे; ओको म जो कोयी काम काज करेंन ऊ मार डाल्यो जाये;3बल्की आराम को दिन तुम अपनो अपनो घरों म आगी तक मत जलाजो।”
पवित्र तम्बू लायी भेंट
4फिर मूसा न इस्राएलियों की सारी मण्डली सी कह्यो, “जो बात की आज्ञा परमेश्वर न दी हय वा या आय।5तुम्हरो जवर सी परमेश्वर लायी भेंट लियो जाये, मतलब जितनो अपनी इच्छा सी देजो चाहेंन हि परमेश्वर की भेंट कर क् या चिजे ले आये; मतलब सोनो, चांदी, पीतल;6नीलो, जामुनी अऊर लाल रंग को कपड़ा, पतलो सूत सी बुन्यो हुयो कपड़ा; शेरी को बाल,7लाल रंग सी रंगी हुयी मेंढा की खाल, सुइसों की खाल; बबूल की लकड़ी,8उजाड़ो देन लायी तेल, अभिषेक को तेल अऊर धूप लायी सुगन्धित मसाले,9तब एपोद अऊर चपरास लायी सुलैमानी गोटा अऊर जड़न लायी मनि।
निवास जागा की विभिन्न चिजों
10“जो बुद्धिमान कारागिर व्यक्ति तुम्हरो बीच म हंय, हि आये अऊर प्रभु की आज्ञा अनुसार या चिजें बनाये, रहन की जागा।11यानेकि तम्बू, अऊर झाकन समेत निवास, अऊर ओकी आकड़ा, छड़, बेंड़ा, खम्बा अऊर तक्ता;12तब डन्डो सहित सन्दूक, अऊर प्रायश्चित को ढक्कन, अऊर बीच वालो परदा;13डन्डो अऊर सब सामान समेत मेज, अऊर भेंट की रोटियां;14सामान अऊर दीपकों समेत उजाड़ो देन वालो दीया, अऊर उजाड़ो देन लायी तेल;15डन्डों समेत धूपवेदी, अभिषेक को तेल, सुगन्धित धूप, अऊर निवास को फाटक को परदा;16पीतल की जाली, डन्डो आदि पूरो सामान सहित होमबलि वेदी, पाय सहित गंगार;17खम्बा अऊर उन्को तक्ता सहित आंगन को परदा, अऊर आंगन को फाटक को परदा;18निवास अऊर आंगन दोयी को खूटा, अऊर रस्सियां;19पवित्र जागा म सेवा काम करतो समय पहिनन को बुन्यो हुयो कपड़ा, अऊर याजक को काम करन लायी हारून याजक को पवित्र कपड़ा, अऊर ओको टुरावों को कपड़ा।”
लोगों द्वारा भेंट लानो
20तब इस्राएलियों की पूरी मण्डली मूसा को आगु सी लौट गयी।21अऊर जितनो ख उत्साह भयो अऊर जितनो को मन म असी इच्छा पैदा भयी होती, हि मिलाप वालो तम्बू को काम करन अऊर ओकी पूरी सेवा अऊर पवित्र कपड़ा ख बनावन लायी परमेश्वर की भेंट लावन लग्यो,22का बाई, का आदमी, जितनो को मन म असी इच्छा पैदा भयी होती हि सब नथनी, अंगुठी, कान की बाली अऊर गरो को हार अऊर सब तरह को सोनो को जेवर लावन लग्यो, जो जो आदमी परमेश्वर ख भेंट चढ़ानो चाहत होतो ओन सोनो लायो।23अऊर जो जो आदमी को जवर नीलो, जामुनी यां लाल रंग को कपड़ा, यां पतलो सूत सी बुन्यो हुयो कपड़ा, यां शेरी को बाल, यां लाल रंग सी रंगी हुयी मेंढा की खाल, यां सुइसों की खाल होती हि उन्ख ले आयो।24फिर जितनो चांदी, यां पीतल की भेंट को देन वालो होतो हि परमेश्वर लायी वसीच भेंट ले आये; अऊर जेको जेको जवर उपयोग म आवन वालो बबूल की लकड़ी होती हि ओख ले आये।25अऊर जितनी बाईयों को दिल म बुद्धि की कला होती हि अपनो हाथ सी सूत कात कात क नीलो, जामुनी अऊर लाल रंग को, पतलो सूत कात क ले आयी।26जितनी बाईयों को मन म असी बुद्धि की कला होती उन्न शेरी को बाल भी बुन्यो।27अऊर मुखिया लोग एपोद अऊर चपरास लायी सुलैमानी मनि, अऊर जड़न लायी मनि,28अऊर प्रकाश देन अऊर अभिषेक अऊर धूप को लायी सुगन्धित मसाले अऊर तेल लायो।29जो जो चिज ख बनावन की आज्ञा परमेश्वर न मूसा को द्वारा दी होती ओको लायी जो कुछ जरूरी होतो, ओख हि सब आदमी अऊर बाईयों ले आयी, जिन्को दिल म असी इच्छा पैदा भयी होती। यो तरह इस्राएली परमेश्वर लायी अपनीच इच्छा सी भेंट ले आयो।
परमेश्वर को उपस्थिति को तम्बू को लायी कारीगर
30तब मूसा न इस्राएली लोगों सी कह्यो, “सुनो, परमेश्वर न यहूदा को वंश वालो बसलेल ख, जो ऊरी को टुरा अऊर हूर को नाती हय, नाम ले क बुलायो हय;31अऊर ओन ओख परमेश्वर को आत्मा सी असो परिपूर्न करयो हय कि सब तरह की कला लायी ओख असी बुद्धि, समझ, अऊर ज्ञान मिल्यो हय32कि ऊ कला की योजना निकाल क सोनो, चांदी अऊर पीतल म,33अऊर जड़न लायी मनि काटन म अऊर लकड़ी पर नक्कासी करन म, बल्की बुद्धी सी सब तरह की निकाली हुयी कला म काम कर सके।34फिर परमेश्वर न ओको मन म अऊर दान वंश को अहीसामाक को टुरा ओहोलीआब को मन म भी शिक्षा देन की शक्ति दी हय।35इन दोयी को दिल ख परमेश्वर न असी बुद्धि सी परिपूर्न करयो हय कि हि कुशल कला अऊर गढ़न वालो अऊर नीलो, जामुनी अऊर लाल रंग को कपड़ा, अऊर पतलो सूत को कपड़ा म काढ़न अऊर बुनन वालो होना, बल्की सब तरह की बनावट म, अऊर बुद्धि सी काम निकालन म सब तरह को काम करे।