1परमेश्वर न मूसा सी कह्यो, फिर निवास जागा लायी दस परदा बनायजो; इन्को पतलो धागा को बिन्यो हुयो नीलो, जामुनी अऊर लाल रंग को कपड़ा को बुन्यो हुयो करूबों को चित्र संग बनायजो।2हर एक परदा की लम्बायी अट्ठावीस फीट अऊर चौड़ायी चार फीट की हो, सब परदा एकच नाप को हो।3पाच परदा एक दूसरो सी जोड़्यो हुयो हो; अऊर फिर जो पाच परदा रहेंन हि भी एक दूसरो सी जुड़्यो हुयो हो।4अऊर जित या दोयी परदा जोड़्यो जाये उत को दोयी कोना पर नीलो नीलो फन्दा लगायजो।5दोयी कोना म पचास पचास फन्दा असो लगवायजो कि हि आमने-सामने हो।6अऊर सोनो को पचास गोल कड़ी बनायजो; अऊर जोड़्यो हुयो परदा ख इन कड़ी सी जोड़ देजो जेकोसी पूरो निवास जागा एक बन जाये।7“फिर निवास को ऊपर तम्बू लायी बकरा को बाल को ग्यारा परदा बनवाजो।8हर एक परदा की लम्बायी तीस हाथ अऊर चौड़ायी चार हाथ हो, असो ग्यारा परदा एकच नाप को हो।9अऊर पाच परदा को एक जोड़ अऊर फिर छय परदा को दूसरो जोड़ अलग जोड़जो, अऊर छठवो परदा ख तम्बू को आगु मोड़ क डबल कर क् लटकाय देजो।10अऊर तय पचास कड़ी उच परदा को कोना म अऊर पचास कड़ी दूसरी तरफ को परदा को कोना म जो बाहेर सी मिलाय क बनवायजो।11अऊर पीतल को पचास कड़ा बनाजो, अऊर कड़ा ख फन्दा म लगाय क तम्बू ख असो जोड़जो कि ऊ मिल क एक होय जाये।12अऊर तम्बू को परदा को लटक्यो हुयो हिस्सा, यानेकि जो अरधो बच्यो रहेंन, ऊ निवास-जागा की पिछली तरफ लटक्यो रहेंन।13अऊर तम्बू को परदा की लम्बायी म सी हाथ भर इत, अऊर हाथ भर उत निवास-जागा को ढकन लायी ओको दोयी तरफ लटक्यो हुयो रहो।14फिर तम्बू लायी लाल रंग सी रंगी हुयो मेंढी की खाल को एक ओढ़नो अऊर ओको ऊपर सुइसों की खाल को भी एक ओढ़नो बनायजो।”15“फिर निवास-जागा ख खड़ो करन लायी बबूल की लकड़ी को चौखट बनायजो।16हर एक तक्ता की लम्बायी दस हाथ अऊर चौड़ायी देढ़ हाथ की हो।17हर एक तक्ता म एक दूसरो सी जोड़ी हुयी दोय दोय खाचा हो; निवास-जागा को सब तक्ता ख येको भाति सी बनवायजो।18निवास-जागा लायी जो तक्ता तय बनवायजो उन्म सी बीस तक्ता त दक्षिन की तरफ लायी हो;19अऊर बीस तक्तां को नीचो चांदी की चालीस आधार-तक्ता बनाजो, मतलब एक एक तक्तां को नीचो ओको खाचा लायी दोय दोय आधार-तक्ता बनवाजो।20निवास को दूसरी तरफ, मतलब उत्तर की तरफ लायी बीस तक्तां बनवायजो;21अऊर उन्को लायी चांदी की चालीस आधार-तक्ता बनवायजो, मतलब एक एक तक्तां को नीचो दोय दोय हो।”22निवास को पीछू तरफ, मतलब पश्चिम की तरफ लायी छय तक्तां बनवायजो।23अऊर पिछलो हिस्सा म निवास को कोना लायी दोय तक्तां बनवायजो;24अऊर या नीचो सी दोय दोय हिस्सा को हो, अऊर दोयी हिस्सा ऊपर को कोना तक एक एक कड़ा म मिलाये जाये; दोयी तक्तां को योच रूप हो; या दोयी कोनो लायी आय।25अऊर आठ तक्ता हो, अऊर उन्की चांदी की आधार-तक्ता हो, मतलब एक एक तक्ता को नीचो दोय दोय हो।26“तब बबूल की लकड़ी को डन्डा बनायजो, मतलब निवास को एक तरफ को तक्तां लायी पाच,27अऊर निवास को दूसरी तरफ को तक्तां लायी पाच डन्डा अऊर निवास को जो भाग पश्चिम की तरफ पीछू भाग म होयेंन, ओको लायी पाच बेंड़े बनायजो।”28बीच वालो डन्डा जो तक्तां को बीच म होयेंन ऊ तम्बू को एक कोना सी दूसरो कोना तक जायेंन।29तक्तां ख सोनो सी मढ़वाजो, अऊर उन्को कड़ां जो डन्डा को सहारा को काम देयेंन उन्ख भी सोनो सी बनवाजो, अऊर बेंड़ा ख भी सोनो सी मढ़वायजो।30अऊर निवास की जागा ख असो रीति सी खड़ो करजो जसो पहाड़ी पर तोख दिखायो गयो हय।31“तब नीलो, जामुनी अऊर लाल रंग को पतलो धागा सी बुन्यो हुयो कपड़ा को एक बीच वालो परदा बनायजो; ओको पर करूबों को चित्र बुन क बनायजो।”32अऊर ओख सोनो सी मढ़यो हुयो बबूल को चार खम्बां पर लटकायजो, इन्की खूटी सोनो की हो, अऊर या चांदी की चार आधार-तक्ता पर लगी हुयो, सोनो को छल्ला म फस्यो होन ख होना।33अऊर बीच वालो परदा ख खूटी को नीचो लटकाय क, ओकी आड़ म साक्षी पत्र को सन्दूक अन्दर ले जानो, यो तरह ऊ बीच वालो परदा तुम्हरो लायी पवित्र जागा ख परम पवित्र जागा सी अलग करयो रहेंन।34फिर परम पवित्र जागा म गवाही चिट्ठी को सन्दूक को ऊपर पश्चाताप को ढक्कन ख रखजो।35अऊर ऊ परदा को बाहेर निवास को उत्तर को तरफ मेज रखजो; अऊर ओको दक्षिन तरफ मेज को आगु दीवट ख रखजो।36फिर तम्बू को द्वार लायी नीलो, जामुनी अऊर लाल रंग को अऊर पतलो धागा सी बुन्यो हुयो एक परदा बनवायजो।37अऊर यो परदा लायी बबूल को पाच खम्बा बनायजो, अऊर उन्ख सोनो सी मढ़वाना; उन्को कड़ां सोनो की हो, अऊर उन्को लायी पीतल की पाच तक्ता ढलवाय क बनायजो।