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उजेरो कि अवलाद बनो

1एकोलाने प्यारो पोरिया-पारी को जसो परमेस्वर को हिसाब से चलो,2अऊर प्रेम म चलो जसो मसी न भी तुम से प्रेम करो, अऊर हमरो लाने अपनो तुम ख सुखदेन वालो सुगन्ध को लाने परमेस्वर को सामने भेंट कर ख बलिदान कर दियो।3जसो सुध्द अदमी हुन को लायक हैं, वसो तुम म गलत काम अऊर कोई भी तरीका को असुध्द या लोभ की चर्चा तक नी होनू चाहिये;4अर न बिना सरम, न बेवाकुफ जसी बात करी, न मजाक कि; काहेकि या बात हुन सोभा नी देवा, पर आसीर्वाद ही सुनो जाय।5काहेकि तुम या जाना हैं कि कोई पाप करन वालो, या असुध्द अदमी, या लोभी अदमी की, जो मूर्तिपुजा को बराबर हैं, मसी अर परमेस्वर को राज म जगा नी।6कोई तुम ख बेकार की बात हुन से धोका नी दे, काहेकि ईच ही काम को वजे से परमेस्वर को घुस्सा कहेना नी मानन वाला पर भड़का हैं।7एकोलाने तुम उनको संग म सहभागी मत होनू।8काहेकि तुम तो पहिले अन्धेरा म हता पर अब प्रभु म उजेरो आय, एकोलाने उजेरो कि अवलाद को जसो चलो।9(काहेकि उजेरोको फल सब प्रकार की भलाई, अर धार्मिकता, अऊर हकीगत या सत्य हैं10अर यू परखनु कि प्रभु ख का भावा हैं।11अंधेरो को बुरो काम हुन म सहभागी मत होनू, लेकिन उन कि बुराई उन ख बताओ।12काहेकि उनका छिपिया काम हुन कि चर्चा भी सरम कि बात हैं।13पर जित्ता काम हुन पा गवाही दी जावा हैं वी सब उजेरो म प्रगट होवा हैं, काहेकि जो सब कुछ ख प्रगट करा हैं उ उजेरा आय।14एकोलाने उ बोला हैं,“अरे सोवन वाला जग,अऊर मुर्दा म से जग या जिन्दो उठ;ते मसी को उजेरो तोरो ऊपर चमकेगो।”15एकोलाने ध्यान से देखनु, कि कसी चाल चला हैं: बिना अकल वाला को जसो नी पर बुध्दिवाला हुन को जसो चलो।16बखत का सही समझनो, काहेकि दिन बुरा हैं।17एकोलाने बे अकली मत हो जो पर ध्यान से समझनू की प्रभु कि मर्जी का हैं।18अंगूर को रस से मतवाला मत बननू, काहेकि ऐसे बुरा काम होवा हैं, पर आत्मा से भरपूर होते जाव,19अऊर एक दुसरो म भजन अर स्तुतिगान अर आत्मिक गाना गयो करनु, अर अपनो मन म प्रभु को जोने गाते अर कीर्तन करते रहनु।20अऊर हमेसा सब बात को लाने हमरो प्रभु यीसु मसी को नाम से परमेस्वर बाप कि जय जयकार करते रहो।21मसी को डर से एक दुसरा को बस म रहो।

अदमी अर ओरत

22ओरत हुन, अपनो अपनो अदमी को असो बस म रहो जसो प्रभु को।23काहेकि अदमी ओरत की मुंडी आय जसो की मसी कलेसिया की मुंडी आय अऊर ऊईच ही सरीर को उध्दार करन वालो हैं।24पर जसी कलेसिया मसी को बस म हैं वसीच ही ओरत हुन भी हर बात म अपनो अपनो अदमी को बस म रहे।25अदमी हुन, अपनी अपनी ओरत से प्रेम रखनू जसो मसी न भी कलेसिया से प्रेम कर ख अपनो तुम ख ओको लाने दे दियो।26कि उन ख वचन को दुवारा पानी को सपड़नो से सुध्द कर ख सुध्द बनाय,27अऊर ओ ख एक जोर दार उजेरो देन वाली कलेसिया बना ख अपनो जोने खड़ी करे, जेमा न कलंक, न झुर्री, न कोई अऊर असी चीज होय पर सुध्द अर बेकसूर होनो।28असोच ही तरीका से जरूर हैं की अदमी अपनी अपनी ओरत से अपनो सरीर को समान प्रेम रखे। जो अपनी ओरत से प्रेम रखा हैं, उ अपनी तुम से प्रेम रखा हैं।29काहेकि कोई न कभी अपनो सरीर से बैर नी रखो पर ओको पालनो-पोसनो करा हैं, जसो मसी भी कलेसिया को संग करा हैं।30एकोलाने कि हम ओको सरीर का धड़ आय।31“एकोलाने इंसान अपनो माय-बाप ख छोड़ ख अपनी घरवाली से मिलो रहेगो, अऊर वी दोई एक तन या सरीर होयगो।”32यू भेद तो बडो हैं, पर मी असो मसी अर कलेसिया को बारे म कहूँ हैं।33पर तुम म से हर एक अपनी घरवाली से अपनो समान प्रेम रखे, अऊर घरवाली भी अपनो घरवालो को डर माने अऊर सम्मान करनो चाहिये।