सभोपदेशक4lbm_twf

1तब मय न ऊ सब अत्याचार देख्यो जो जगत म होवय हय। अऊर का देख्यो, कि अत्याचार सहन वालो को आंसू बह्य रह्यो हंय, अऊर उन्ख कोयी शान्ति देन वालो नहीं! अत्याचार करन वालो को हाथ म शक्ति होती, पर उन्ख कोयी शान्ति देन वालो नहीं होतो।2अऊर मय न घोषना करी हय, कि जो पहिले मर चुक्यो हय, हि उन जीवतों सी ज्यादा खुश हय।3पर मरयो हुयो अऊर जीन्दो आदमियों सी महान हय ऊ आदमी जेको जनम नहीं भयो हय, जेन धरती पर करयो जान वालो दुष्कर्मों ख नहीं देख्यो हय।4तब मय न सब मेहनत को काम अऊर सब सफल कामों ख देख्यो जो लोग अपनो पड़ोसी सी जलन को वजह करय हंय। यो भी बेकार हय या मानो हवा ख पकड़नो जसो हय।5मूर्ख हाथ पर हाथ रख क बैठ्यो रह्य हय, अऊर मानो अपनो आप ख बर्बाद करय हय।6मुट्ठी भर मन को चैन, दोय मुट्ठी मेहनत सी बड़ो हय, जो मानो हवा ख पकड़नो हय।7तब मय न धरती पर या भी बेकार बात देखी।8कोयी अकेलो रह्य हय अऊर ओको कोयी नहाय; न ओको टुरा हय, न भाऊ हय तब भी ओको परिश्रम को अन्त नहीं होवय; न ओकी आंखी धन सी सन्तुष्ट होवय हंय; अऊर न ऊ कह्य हय, मय कोन्को लायी मेहनत करतो अऊर अपनो जीवन ख सुख शान्ति सी दूर रखू हय? यो भी बेकार अऊर दु:ख भरयो काम हय।9एक सी दोय अच्छो हंय, कहालीकि उन्को मेहनत को अच्छो फर मिलय हय।10यदि उन्को म सी एक गिरेंन, त दूसरो ओख उठायेंन; पर हाय ओको पर जो अकेलो होय क गिरेंन अऊर ओको कोयी उठान वालो नहाय।11यदि दोय जन एक संग सोयेंन त हि गरम रहेंन, पर कोयी अकेलो कसो गरम होय सकय हय?12यदि कोयी अकेलो पर भारी होवय हय त हय, पर दोय ओको सामना कर सकेंन। जो दोरी तीन धागा सी बटी हो वा जल्दी नहीं टूटय।13बुद्धिमान जवान गरीब होन पर भी असो बूढ्ढा अऊर मूर्ख राजा सी ज्यादा अच्छो हय जो सलाह नहीं मानय,14होय सकय हय कि ऊ ओको राज्य म गरीब पैदा भयो हो या होय सकय हय कि ऊ जैलखाना सी निकल क राजा भयो होना।15मय न धरती पर घुमतो हुयो पूरो जीन्दो लोगों ख ऊ दूसरो जवान को तरफ जातो हुयो देख्यो, जो पहिले वालों की जागा लेयेंन।16हि सब लोग अनगिनत होतो जिन्को पर ऊ प्रधान भयो होतो। तब भी भविष्य म होन वालो लोग ओको वजह खुश नहीं होयेंन। नि:सन्देह यो भी बेकार हय, अऊर मानो हवा ख पकड़नो हय।