1पुन यो फोम राख कि आखरी दाहड़ा मा वातड़ो टेहाव आवसे।2काहकि मानुस स्वार्थी, धन को लालची, डीगमार, डाहवाळा, निन्दा, माय बास की हुकुम टावनेवाव, विटुळ।3मोंग नी करनेवावा, माफ नी करनेवावा, दोष लागाड़ने वावा, कुमनीयो वातड़ो, भले क दुस्मन।4विश्वासघाती, एक हेट्यो, डाहवाळा, आरू यहोवा–भगवान को मोंग नी वरना सुखवास ही क जूवनेवावा होछे।5वो भक्ति क ढोग तो करसे, पर ओकी शक्ति क नी मानछे; ओसो छे पोरा रोवनो।6इन्ही मा छे वो मानसे छे जो घर मा डाबाय पाय आवता छे, आरू तीनुक कमजोर बायर क वश मा कर लेता छे जो पाप छे डाबाय आरू हर प्रकार की लालोच क वश मा छे।7आरू सदा सीखती तो रयती छे पर सचाय निजाने।8जोसो यन्नेस आरू यम्ब्रेस ने मूसा क विरोध कर्यो होतो, वोसो ही यो भी सही क विरोध करता छे; यो ओसो मानुस छे, जिन्दरी बुध्दि भ्रष्ट होय गयी छे आरू वो सच्चाईन बारा मा बिगड़ी ज्या।9पुन वो इन्दरे ओगव नी बढ़ सकता, काहकि जोसो इन्दरी विनअकल सब मानसे पर प्रगट होय गयी होती, वोसो ही इन्दरे भी होय जाछे।
तीमुथियुस क विशेष निर्देष
10काहकि तु ने शिक्षा, चाल–चालन, मनसा, विश्वास, सहनशीलता, मोंग, धीरज, आरू सताय जाने, आरू दुःख उठावने मा मारो साथ दिदा।11आरू ओसो दुःख मा भी जो अन्ताकिया आरू इकुनियुम आरू लुस्त्रा मा मखे पर पड्यो होतो, आरू दिसरा दुःख मा भी जो हाव झेलीयो छे; काहकि पोरबु ने मखे तीनू सब छे छुड़वी लेदु।12पुन जोतरा मसीह ईशु मा भक्ति क साथे जीवन देखड्या जूवता छे चे आखा सताया जाछे।13काहकि दुष्ट आरू भड़कावने वावु धोखा देता होया आरू धोखा खाता होया, बिगड़ता चाली जाछे।14पुन तु तिनी वात पर जो तु ने सीखी छे आरू विश्वास कर्या छे, यो जानीन वातड़ा बन रया कि तु ने तीनुक किन मानछे छे सीख्यो छे।15आरू बचपन छे चुखलो शास्त्र तारो जानो हुयो छे, जो तुखे मसीह पर विश्वास करने छे उध्दार हासिल करने क करता बुध्दिमान बन सकता छे।16सम्पूर्ण चुखलो शास्त्र यहोवा–भगवान की अगवायन लारे रची गयी छे आरू शिक्षा, आरू समझने, आरू सुधारने, न्यायपन की शिक्षा क करता लाभदायक छे।17ताकि यहोवा–भगवान क जन सिध्द बन, आरू हर एक वारला काम क करता तत्पर होय जाय।