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ठगरा गुरू

1ठगरा ग्यानी मनसे इस्राएल देस हे परगट होय रहिन, ठीक उहैमेर तुम्हर बीच ठगरा गुरू हुइहीं, जउन लुके मेर लग आदेस ना मानै बाले भरमामै बाले जसना मेर परचार करही, उन स्वामी के नेहको मनही, जउन उनही खरीद लय हबै, अउ हइ मेर उन जलदी अपन नास के कारन बनही।2बोहत मनसे उनखर जसना लुचपन के चाल चलन चलही, अउ उनखर कारन सत्य के रास्ता निन्दा करे जही।3उन लालच हे तुमही अपन मन गडन्त बातन हे फसाय के तुम्हर लग बेकार फायदा उठाही, उनखर निता नियाव सजा पहिले लग तय हुइ चुके हबै, अउ ऊ उनखर पाछू करत हबै, उनखर नास सोय हर नेहको हबै।4जब भगवान उन पापी स्वरगदूतन के माफ नेहको करिस, बलुक उनही नरक के अंधियार कुन्ड हे नियाव के रोज के निता सांकड हे बांध दय हबै।5जब ऊ पुरान युग के दुनिया के नेहको छांडिस, पय पानी के बाढ के दवारा पापिन दुनिया के नास करिस, पय ऊ नियाइपन धरमी काम करै बाले नूह अउ ओखर परवार सहित आठझन मनसेन के बचाइस,6भगवान उन मनसेन के चेतावनी देय के निता, जउन भभिस्य हे पाप करैका सोचहीं, ता सदोम अउ अमोरा के सहर के भसम करके बिनास के सजा दइस, कि उन आमै बाले पापिन के निता उदाहरन बन जाय। असना सजा दयइस कि उनही नास करके राख के दइस,7पय भगवान ऊ धरमी लूत के बचाइस, जउन उन दुस्ट मनसेन के गलत काम बेकार चाल चलन लग बोहत दुखी रहिस, उनखर लग मुकति दइस।8लूत उन धरमी मनसेन के बीच हे रहत, उनखर रोज दिना गलत काम चाल चलन देखत अउ सुनत रहिस, इहैनिता ओही अन्तर आतमा हे दुख होत रहिस।9हइ मेर हम देखथन कि परभु हइ जानथै कि धरमी मनसेन के कउन मेर परिक्छा लग निकाडथै, अउ कउन मेर पापिन के नियाव के रोज हे सजा देय के निता बचाय के रखे हबै।10खास करके उन मनसेन के, जउन देह के असुध्द कामन हे लिप्त रथै अउ भोग बिलास हे जीवन गुजारत हबै, अउ सासक के बेकार समझथै, उन ढीठ, घमंडी मनसे अउ स्वरगी जन तक के निन्दा करै लग नेहको डेराय,11जब कि स्वरगदूत तक, जउन इनखर लग कहुं बोहत सक्तिसाली अउ सक्ति हबै, परभु के आगू उनखर हे भला बुरा कहिके दोस नेहको लगाथै।12हइ मनसे उन निरबुध्दि पसुन के जसना हबै, जिनखर पइदा असना पसुन के जसना होय हबै कि इनही पकरके इनही काटे जाय, उन असना बातन के निन्दा करथै, जेखर इनही कउनो ग्यान नेहको हबै, उन पसुन के मेर नास हुइ जइही,13इन बेकार कामन के सजा भोगही, उन दिन दुपहरी भोग बिलास करै के पसंद करथै, उन कलंक अउ पापी हबै, अउ तुम्हर संग खात पियत हबै, ता अपन पार लग माया भोज करके एसो आराम करथै।14उनखर आंखिन हे गलत कामन लग भररे हर हबै, अउ उन पाप करै लग नेहको चुकै, उन कमजोर आतमा बालेन के ललचोथै, उनखर मन लालच लग भररे हर हबै, उन सराप पाय हरन के लरका हबै,15बओर के टोरवा बिलाम के जसना, जउन अधरम के कमाय हर पइसा के लालच करिस, यहों सच्चाई के सिध्धा रास्ता के छांड के भटक गइस,16पय उके अपन अपराध के डांट सुनै के पडिस, अक्ठी बउरा गदहा मनसेन के जसना बोलै लगिस अउ ऊ ग्यानी मनसे के पगलापन लग सम्भर गइस।17उन मनसे सुखाय हर कुंवा अउ आंधी दवारा उडाय हर कोहिटा हबै, जिनखर निता गहिड अंधियार ठहराय गय हबै।18उन घमंड लग भरे हर बेकार बातन लग उन मनसे देह के अभिलासा हे फसाय लेथै। जउन रास्ता लग भटके मनसेन मसे बाल-बाल बच के निकर आय हबै।19ऊ उनके आजाद करै के टीमा तो करथै, पय खुद पाप के गुलाम हबै, काखे जउन मनसे जेखर लग हार गय हबै, ऊ ओखर हरवाह बन जथै।20जउन मनसे हमर परभु यीसु मसीह अउ मुकतिदाता के सगलू ग्यान पाय के दुनिया के पापन लग बच गइस, उन अगर फेरै उहै हे फस के उनखर कबजा हे हुइ जथै, ता उनखर पहिले के दसा लग अउ बत्तर हुइ जथै।21सही तो इहै होथै कि उन नियाइपन धरमी रास्ता के अहसास नेहको होय होतिस बजाय एखर लग कि ऊ ओही जानै के बाद, जउन पवितर आदेस उनही सउपे गय रथै ओखर लग उन मुंह मोडथै,22उनखर चाल चलन हइ कहावत हे ठीक बइठथै, “कुकरा अपनेन ओछरे हर के फेरै खथै” अउ “नहवाय हर सुअरनी फेरै चिखला हे जाय के लोटथै।”