आकरी चेतावणी ने आव-भाव
1हय तीसरी कावा मे तुंद्रे धड़े आवो, “दुय नीते तीन गवान मुंहडा सी हरीक एक वात ठेहरावसे।”2जसु मे जत्यार दीसरी कावा तुंद्रे साते हतलु, असुत हय छेटा रवते जाय हीनु माणसे सी जे पेहल पाप कर्या, ने दीसरा आखा माणसे सी हय पेहल सी कय दम, की कदी मे अळी आवीस, ती नी छुड़ो,3काहाकी तुहुं ते हेरो सबुत चाहु, की मसी मारे मां बुले, जे तुंद्रे वाटे लुला नी; बाकुन तुंद्रे मां ताकत छे।4चु लुलान वजे कुरुस पर चड़ाय ते गुयु, तेबी भगवानेन ताकत सी जीवतेलु छे, हामु बी हेरेमां लुलु छे; बाकुन भगवानेन ताकत सी जे तुंद्रे वाटे छे, हेरे साते।5आपणे आप काजे पारखु, की भुरसा मां छे की नी; आपणे आप काजे पारखु, काय तुहुं आपणे बारामां ज्य नी जाणे, की ईसु मसी तुंद्रे मां छे। नीते तुहुं पारख मां पापी नीकळे।6बाकुन मारी आस छे, की तुहुं जाणी लेसु, की हामु पापी नी हय।7हामु आपणा भगवान सी जी दुवा करजे, की तुहुं काय बी कुहराय नी करु; हेरेसी नी, की हामु खरला देखाव पड़े, बाकुन हेरेसी की तुहुं भलाय करु, चाहे हामु पापी रवजे।8काहाकी हामु छाचाय्न वीरुद मां काय बी नी कर सकजे, बाकुन सय वाटे कर सकजे।9जत्यार हामु लुला छे, ने तुहुं जुर वाळाछे, ती हामु खुसी हवजे, ने जी दुवा बी करजे, की तुहुं सय हय जावु।10एरे वजे सी मे तुंद्रे आसा पछळ जी वात लिखो, की तुंद्रे अगळ उबु हयन मेसे हीना हकेन अनसारे तीनाक मालीक बीगाड़ने वाटे नी बाकुन बणावणे वाटे मेसे आपलु छे, काठा एहवार सी मेसे काय करनु नी पड़े।आव-भाव
11अळतेन ए भायसे, खुसी मां रवु; सय बणी जावु; हिम्मत राखु; एकुत मन रवु; मेळीन रवु, ने परम ने सांतीन दातान भगवान तुंद्रे साते रवसे।12एक दीसरा काजे चुखला गुळुदीन आवजु ने आवीस कवो।13मालीक ईसु मसीन दया, ने भगवानेन परम आखा चुखली-आत्मान साजेदारी बणीन रवे।14मालीक ईसु मसीन गीण-दया ने भगवानेन परम ने चुखली-आत्मान साजी तुहुं आखा साते हवती रवे।