1तुम ख मोरी जसी चाल चल हैं जसो म मसी कि जसी चाल चलू हैं।
आराधना म सिर ढाँकनू
2अरे भई हुन, मी तुमख सराहता हूँ कि सब बात हुन तुम मोखा याद करत हो; जे रीति रिवाज मी न तुमख सोउपू हैं उनको पालन करत रहजे।3अदि म चाहूँ हैं कि तुम ख यू मालूम होय कि हर एक अदमी को माथा मसी हैं, अऊर ओरत हुन को माथा अदमी आय, अऊर मसी को सिर परमेस्वर आय।4जे अदमी माथा ढाँको होय प्रार्थना अऊर भविस्यव्दानी करिये हैं, उ अपनो माथा ख लज्जित करिये हैं।5पर जे ओरत हुन माथा पर बिना कपड़ा लेख प्रार्थना अर फिर भविस्यव्दानी करिये हैं, उ अपनो माथा को लज्जित करिये हैं, काहेकि उ मुण्डी होनू का बराबर हैं।6अदि बाई हुन ओढ़नी नी ओढ़े ते बाल भी काट ले; अदि ओरत का लाने बाल कटानो अर फिर मुण्डन करानो लज्जा कि बात हैं, ते ओढ़नी ओढ़े।7हाँव, अदमी ख अपनो माथा ढ़ाकनो जरूरी नी, हैं काहेकि उ परमेस्वर को जसो चहेरा हैं अऊर महिमा हैं; अऊर बाई अदमी कि सोभा आय।8काहे कि अदमी बाई से नी भयो, अऊर बाई अदमी से भई हैं;9अऊर अदमी बाई का लाने नी बनायो गयो, अऊर बाई अदमी का लाने बनायो गयो हैं।10एकोलाने स्वर्गदूत हुन का कारन बाई ख अच्छो हैं कि अधिकार अपनो माथा पर रख जो।11ते भी प्रभु म नी ते बाई बिना अदमी, अऊर नी अदमी बिना बाई को आय।12काहेकि जसो बाई अदमी से हैं, वसो ही अदमी बाई को दुवारा हैं; पर सारी चीज हुन परमेस्वर से हैं।13तुम ख स्वंय ही सालह कर, का बाई ख उघाड़े माथा परमेस्वर से प्रार्थना करनु सोभा देवा हैं?14का स्वाभाविक रीति से भी तुम नी जान हैं, कि अदि अदमी लम्बे बाल रख, ते ओखा लाने अपमान हैं।15अऊर अदि बाई लम्बे बाल रखे ते ओखा लाने सोभा हैं, काहेकि बाल ओ ख ओढ़नी का लाने दियो गयो हैं।16अदि अऊर कोई लड़ाई करनो चाहे, ते यी जान ले कि नी हमारी अऊर परमेस्वर कि कलीसिया हुन कि असी रिवाज हैं।
प्रभु भोज का बारा म
17पर यी आदेस देते होय मी तुम ख नी सराह उ हैं, एकोलाने कि तुमारो इकट्ठा होना से अच्छाई नी हैं, अऊर तुम ख बुराई होय हैं।18काहेकि पहले ते यह हैं कि मोरो सुनन म आयो हैं, कि जब तुम ख कलीसिया म जमा होय हैं, ते तुम म फूट होय हैं, अऊर म यी पर थोड़ा विस्वास भी कर हैं।19काहेकि दलबन्दी भी तुम म जरू होए, एकोलाने कि जो अदमी तुम म विस्वास लायक हैं वी देख ना म आ जाहे।20अब तुम जो एक जगह म जमा होय हैं ते यी प्रभु-भोज खान का लाने नी,21काहेकि खान का बखत एक दूसरा से पहले अपनो रोटी खा ले हैं, यी तरीका से कुई ते ख भूखो रह हैं अऊर कुई नसा वालो होय जाहे हैं।22का खान पीवन का लाने तुमारो घर नी हैं? ते परमेस्वर कि कलीसिया ख बेकार जान हैं, अऊर जेका पास नी हैं उन ख लज्जित करिये हैं? म तुम से का कहूँ हैं वा? का यी बात हुन म तुमारो खुसी करूँ? इ बात को लाने मी नी मेरी प्रसंसा करूँ हैं।23काहेकि यी बात हुन मोखा प्रभु यीसु न जी रात उ पकड़वायो गयो, रोटी ली,24अऊर धन्यवाद कर ख ओ ख तोड़ी अऊर कय्हो, “यी मोरो सरीर आय, जो तुमारो लाने हैं: मोरो याद का लाने यी कियो कर।”25यू रीति से जो ओ न बियारी का पीछु कटोरा भी लियो अऊर कय्हो, “यी कटोरा बर्तन मोरो खून म नई वादा हैं: जब कभी पीवा हैं, ते मोरो याद का लाने यी कियो कर।”26काहेकि जब तुम ख यी रोटी खाव अऊर यी कटोरा म से पीवा हैं, ते प्रभु कि मरन ख जब तक उ नी आगो प्रचार करते रहे।27एकोलाने जो कोई भूल चूक रिवाज से प्रभु कि रोटी ख खाव, ते ओकी कटोरा म से पीए, उ प्रभु कि सरीर की जीवन अऊर खून का अपराधी रहे।28एकोलाने अदमी अपनी तुम ख परखे ले अऊर यी तरीका से यी भोज म से खाऐ, अऊर यी कटारो म से पीए।29काहेकि जो खाव-पीते बखत प्रभु को सरीर ख नी पहिचाने, उ यी खाने अऊर पी से अपनो ऊपर सजा लाहे हैं।30यू तीरका तुम म बेजा सारा सो दुखी अऊर बीमार हैं, अऊर बेजा सारा मर भी गया।31अदि हम ख अपनो तुम ख परखे ते सजा नी मिले।32अऊर प्रभु हम ख सजा दे ख हमारी परख हैं, एकोलाने कि हम ख दुनिया को संग दोसी नी रह।33एकोलाने, अरे मोरो भई बहिन हुन, जब तुम ख खान का लाने इकट्ठा होय हैं ते एक दूसरा का लाने रूको रह।34अदि कोई भूखो हैं ते अपनो घर म खा ले, जे से तुमारो इकट्ठा होन का सजा को कारन नी हैं। अर बात हुन ख म आँख चोक्खो करूँ हैं।